सारंगढ़। स्थानीय नगर में भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य रथयात्रा इस वर्ष पूरे श्रद्धा, उल्लास और ऐतिहासिक संयोग के साथ निकाली गई। झमाझम बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और पूरा नगर “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गुंजायमान रहा। नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और निजी समूहों द्वारा निकाले गए रथों ने धार्मिक माहौल को और भी भव्य बना दिया।
नगर की सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक बड़े मठ मंदिर की लगभग 100 वर्षों से चली आ रही भगवान श्री जगन्नाथ महाप्रभु की रथयात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। परंपरा के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। इसके अलावा राज घराने का रथ, बड़े मठ मंदिर का रथ, छोटे मठ गोपाल जी मंदिर का रथ, केसरवानी समाज, गुप्ता समाज सहित अन्य सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के रथ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने।
इस वर्ष की रथयात्रा का सबसे ऐतिहासिक क्षण तब देखने को मिला, जब नगर के चार प्रमुख संगठनों के अध्यक्षों ने एक साथ भगवान के रथ के समक्ष पारंपरिक ‘छेरा पहरा’ की पवित्र रस्म निभाई। इस अवसर पर गोपाल जी धर्मादा ट्रस्ट एवं बड़े मठ के अध्यक्ष सूरज तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय पाण्डेय, भगवान परशुराम सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश शुक्ला तथा जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विजय कुमार तिवारी ने विधिवत छेरा पहरा कर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस ऐतिहासिक संयोग ने रथयात्रा को और भी यादगार बना दिया।
भव्य रथयात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुनः अपने प्रारंभिक स्थल पर पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते रहे और भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। मूसलाधार बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
रथयात्रा के दौरान नगर में शांति, सुरक्षा एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने में जिला पुलिस की भूमिका सराहनीय रही। आयोजन में नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष अमित तिवारी, अतुल्य यादव, गोपेश द्विवेदी, मनोज मिश्रा, दिनेश थवाईत, एल.पी. देवांगन सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वहीं गोपाल जी मंदिर (छोटे मठ) के रथ में पीपरडुला आश्रम के महंत सीताराम जी भी शामिल हुए।
बारिश की फुहारों के बीच निकली यह भव्य रथयात्रा आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण बन गई। पूरे नगर में भगवान श्री जगन्नाथ की भक्ति का ऐसा वातावरण रहा कि हर ओर केवल “जय जगन्नाथ” के जयघोष ही सुनाई देते रहे।





