सारंगढ़। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में सारंगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खदानों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया गया। सारंगढ़ विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक-229 के जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वीकार किया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कई चूना पत्थर खनिज ब्लॉकों की प्रक्रिया जारी है और इनसे अनेक गांवों के साथ-साथ सारंगढ़ नगर पालिका के कई वार्ड भी प्रभावित होंगे।
सरकार द्वारा सदन में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार जिले में चार प्रमुख चूना पत्थर खनिज ब्लॉक प्रस्तावित हैं। लालाधुर्वा-जोगनीपाली चूना पत्थर ब्लॉक से धौराभांठा, जोगनीपाली, कपिसदा, लालाधुर्वा और सरसरा गांवों की लगभग 200.902 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इस ब्लॉक के लिए 11 सितंबर 2023 को आशय पत्र (एलओआई) जारी किया जा चुका है।
वहीं खैराहा चूना पत्थर ब्लॉक के अंतर्गत खैराहा, जुनाडीह, रांपागुला, चंदाई सहित सारंगढ़ क्षेत्र की लगभग 227.967 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इसमें सारंगढ़ नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-10 की 123.752 हेक्टेयर भूमि भी शामिल है। इस ब्लॉक की नीलामी के लिए एसआईटी जारी करने की प्रक्रिया जारी है।
इसी प्रकार कुटेला-दुर्गापाली चूना पत्थर ब्लॉक से हरिहरपाली, कुटेला, खम्हारडीह, भैंसादहान और भोजपुर की लगभग 166.308 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। इसमें नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-1 एवं 2 की 91.943 हेक्टेयर भूमि भी शामिल है।
खम्हारडीह चूना पत्थर ब्लॉक के अंतर्गत गाताडीह, खम्हारडीह, कुटेला, पचपेड़ी और सुलोनी की लगभग 377.132 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होने का अनुमान है। इसमें नगर पालिका के वार्ड क्रमांक-1 की 29.633 हेक्टेयर भूमि भी शामिल है। इस ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया भी जारी है।
मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि अभी खनिज पट्टा स्वीकृति और अनुबंध की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसलिए प्रभावित किसानों और परिवारों की अंतिम संख्या तय नहीं की गई है।
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि प्रस्तावित चूना पत्थर खदानों के विरोध में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों द्वारा अब तक 12 आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इन आवेदनों के आधार पर कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ को पूरे मामले की समुचित जांच और परीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगड़े ने सदन में कहा कि प्रस्तावित चूना पत्थर खदानों से किसानों की कृषि भूमि, पर्यावरण, जल स्रोत, सांस्कृतिक विरासत और सारंगढ़ नगर की आबादी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए व्यापक परीक्षण कराने तथा जनता के हितों के विपरीत किसी भी खनन परियोजना को आगे नहीं बढ़ाने की मांग की।

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