सारंगढ़ : सरकारी फाइलों में जादूगरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। धरातल पर पानी की एक बूंद का इंतजाम नहीं हुआ, लेकिन कागजों पर ‘सुभाष बोरवेल एंड पम्प्स’ के नाम से लगभग डेढ़ लाख रुपये (1,50,000 रुपये) का भारी-भरकम बिल लगाकर गुपचुप तरीके से भुगतान भी कर दिया गया।
इस वित्तीय गड़बड़झाले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि
“जब धरातल पर बोरवेल का कोई काम हुआ ही नहीं है, तो फिर आखिर किस आधार पर और किसकी शह पर लाखों रुपये का भुगतान एडवांस में कर दिया गया? यह जनता के पैसों की खुली लूट नहीं तो और क्या है?”

पंचायत सचिव ने उड़ाई नियमों की सरेआम धज्जियां-
जब इस पूरे महाघोटाले और वित्तीय अनियमितता को लेकर संबंधित पंचायत सचिव से तीखे सवाल पूछे गए, तो उन्होंने एक ऐसा अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया जिसने सबको चौंका दिया। अपनी खाल बचाते हुए सचिव महोदय ने सफाई दी कि “कार्य को जल्द ही पूरा करवा लिया जाएगा।”
सचिव का यह कबूलनामा खुद में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत है। नियम कहते हैं कि किसी भी सरकारी कार्य का
भौतिक सत्यापन होना अनिवार्य है।
कार्य का मूल्यांकन किया जाता है।
इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने और काम संतुष्ट पाए जाने के बाद ही भुगतान की फाइल आगे बढ़ती है।
ऐसे में सचिव का यह बयान साफ बयां कर रहा है कि सरकारी तिजोरी से पैसा पहले ही निकाल लिया गया और काम बाद में कराने की बात कही जा रही है। यह सीधे तौर पर गंभीर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग का मामला है।
जनपद सीईओ की साख दांव पर-
इस बड़े खुलासे के बाद अब गेंद पूरी तरह से शासन-प्रशासन के पाले में है। जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है और हर आंख अब जिला प्रशासन और जनपद सीईओ की तरफ टिकी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, या फिर हमेशा की तरह इस बार भी इस गंभीर मामले को रफा-दफा कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? स्थानीय जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है।




