सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकास की एक ऐसी “अदृश्य गंगा” बह रही है, जिसे देखने के लिए आपको धरातल पर जाने की जरूरत नहीं है, बस पंचायत के खाते और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बिल देख लीजिए। ग्राम पंचायत बटाऊपाली ‘अ’ से भ्रष्टाचार का एक ऐसा नायाब नमूना सामने आया है, जहां बिना किसी भौतिक दुकान के ही लाखों रुपये के सीमेंट, ईंट और बोर पंप न सिर्फ खरीद लिए गए, बल्कि उनका भुगतान भी कर दिया गया।
जिस फर्म के नाम पर यह पूरा खेल रचा गया है, उसका नाम है ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’। क्षेत्र के लोगों के लिए यह फर्म किसी ‘मिस्टर इंडिया’ से कम नहीं है!क्योंकि यह धरातल पर किसी को दिखती नहीं, लेकिन सरकारी चेक बुक पर इसका नाम सबसे ऊपर चमकता है।

धड़ाधड़ साफ किए ₹3 लाख-
वायरल हो रहे बिलों की कड़ियां इतनी सटीक जुड़ी हैं कि कोई भी नौसिखिया भी समझ जाए कि यहाँ कमीशन का नेटवर्क कितना मजबूत है। मई 2026 के एक ही महीने के भीतर बिना वजूद वाली इस फर्म के नाम पर करीब 2,97,000 रुपये के बिल पास करा लिए गए, जिसके पुख्ता सबूत देखे जा सकते हैं।
05/05/2026 (बिल क्र. 06) नलकूप में पाइप डालने के नाम पर एकमुश्त ₹40,000 का बिल लगाया गया ।
10/05/2026 (बिल क्र. 15): बोर मोटर पंप और ‘CRI Submersible Pump’ के नाम पर सीधे ₹1,07,000 का आहरण कर लिया गया।
18/05/2026 (बिल क्र. 30): स्कूल भवन में पानी व्यवस्था के नाम पर ₹50,000 ठिकाने लगाए गए ।
24/05/2026 (बिल क्र. 40): ‘शौचालय निर्माण’ के नाम पर 100 बोरी अल्ट्राटेक सीमेंट, ईंट और रेत दिखाकर सीधे ₹1,00,000 का आहरण किया गया।
इसके अलावा, बहती गंगा में हाथ धोते हुए शिवकुमार साहू नामक एक अन्य रिपेयरर के नाम पर भी 17/05/2026 को ₹25,350 का बिल पास करा लिया गया। मजेदार बात यह है कि इन सभी फर्जीवाड़े के कागजों पर ग्राम पंचायत बटाऊपाली ‘अ’ की सरपंच ‘अनीता’ के हस्ताक्षर और बकायदा शासकीय सील-मोह्रर लगी हुई है।
बंद कमरों में बंटा कमीशन?
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन विकास कार्यों के नाम पर यह राशि निकाली गई है, वे धरातल पर या तो पूरी तरह गायब हैं या फिर कागजी घोड़ों तक सीमित हैं। ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ के बिलों पर न तो कोई स्पष्ट जीएसटी नंबर (GSTIN) का वैधानिक उल्लेख है और न ही वह कोई पंजीकृत दुकान है।
बिना किसी भौतिक सत्यापन और बिना वास्तविक दुकान के, पंचायत के खाते से सीधे वेंडर के खाते में लाखों रुपये की राशि किस ‘अदृश्य आशीर्वाद’ के दम पर ट्रांसफर हुई?
क्या सब-इंजीनियर और जनपद के जिम्मेदार साहबों ने इस कार्य का मूल्यांकन सिर्फ बंद कमरों में बैठकर मिलने वाले कमीशन के हिस्से के आधार पर कर दिया?

साहब क्यों मौन?

इस पूरे वित्तीय गबन और जालसाजी पर सरपंच, सचिव से लेकर संबंधित विभाग के आला अधिकारी मुंह में दही जमाए बैठे हैं। बटाऊपाली ‘अ’ तो महज एक बानगी है, स्थानीय सूत्रों की मानें तो सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की दर्जनों पंचायतों में फर्जी वेंडरों के नाम पर सरकारी खजाने को लूटने का यही खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
अब देखना यह है कि जिले के नव नियुक्त कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ इस कागजी ‘विश्वनाथ ट्रेडर्स’ और सरपंच-सचिव की जुगलबंदी पर कोई कड़ा हंटर चलाते हैं, या फिर हमेशा की तरह इस महाघोटाले की फाइल को भी कमीशन के वजन तले दबा दिया जाएगा।






