सरसिंवा। स्थानीय पुलिस और जांच टीम की बेहतरीन व वैज्ञानिक विवेचना की बदौलत न्यायालय ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले दो आरोपियों को ऐतिहासिक और कड़ा सबक सिखाया है। विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 35/2024 (मूल अपराध क्रमांक 54/2024, धारा 20(b)(ii)(C) NDPS एक्ट) की सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी आकाश ठाकुर और सूरज प्रसाद साहिब को दोषी पाते हुए 15-15 वर्ष के सश्रम (कठोर) कारावास तथा 1,50,000-1,50,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
इसके अतिरिक्त, आरोपी आकाश ठाकुर को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 465 के तहत भी दोषी पाया गया, जिसमें उसे 02 वर्ष के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये के अतिरिक्त जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर दोनों अभियुक्तों को 06-06 माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।

टीकाराम खटकर की सटीक जांच ने नहीं छोड़ा कोई लूपहोल-

इस पूरे मामले को अंजाम तक पहुंचाने और आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने में विवेचना अधिकारी टीकाराम खटकर की अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय भूमिका रही। अपराध की तिथि 02 फरवरी 2024 से लेकर साक्ष्यों को सहेजने, गवाहों के बयान दर्ज करने और वैज्ञानिक कड़ियों को जोड़ने में उन्होंने इतनी सूक्ष्मता और सटीकता दिखाई कि आरोपी अदालत में बच नहीं सके। उनकी पुख्ता कानूनी चार्जशीट के कारण ही बचाव पक्ष के पास कोई रास्ता नहीं बचा, जिससे केस बिना किसी रुकावट के दोषसिद्धि तक पहुंचा।
महज 28 महीने में आया ऐतिहासिक फैसला-
इस मामले की एफआईआर 02.02.2024 को दर्ज की गई थी। इसके बाद लगातार साक्ष्य (Evidence) और गवाहों की प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए माननीय न्यायालय द्वारा 03 जून 2026 को यह कड़ा फैसला सुरक्षित कर सुनाया गया। आरोपी अपनी गिरफ्तारी (02.02.2024) के बाद से ही लगातार कुल 28 माह 01 दिन तक न्यायिक रिमांड (जेल) में बंद थे, जिसे उनकी मुख्य सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
कोर्ट का सख्त रुख-
न्यायालय ने अपने 50वें पृष्ठ के फैसले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS) 1985 की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत गांजे की मात्रा वाणिज्यिक श्रेणी की थी। ऐसे मामलों में कानूनन न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर 20 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। प्रकरण की गंभीरता, गांजे की विशाल मात्रा और समाज पर पड़ने वाले इसके बुरे असर को देखते हुए न्यायालय ने कोई भी नरमी बरतने से इनकार कर दिया और दोनों को 15-15 साल की सख्त सजा देकर जेल भेज दिया।
इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद क्षेत्र के नागरिकों ने सरसिंवा पुलिस प्रशासन और विशेषकर सटीक विवेचना करने वाले अधिकारी टीकाराम खटकर की कार्यशैली की जमकर सराहना की है।
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