सारंगढ़। मेहनत, आत्मविश्वास और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से किस्मत कैसे बदली जा सकती है, इसका प्रेरणादायक उदाहरण सारंगढ़ जिले के ग्राम कपिस्दा की चितकुंवर राव ने पेश किया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अपने समूह की महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त करने का काम किया। आज चितकुंवर राव “लखपति दीदी” के रूप में क्षेत्र में नई पहचान बना चुकी हैं।
सुशासन शिविर उच्चभीठी में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए चितकुंवर राव ने बताया कि उन्होंने शगुन स्व सहायता समूह के माध्यम से 3 लाख रुपये का बैंक लोन लिया था। इस राशि से समूह ने सर्फ और साबुन निर्माण का लघु उद्योग शुरू किया। मेहनत और बेहतर योजना के दम पर समूह ने कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाया और महज एक वर्ष के भीतर पूरा 3 लाख रुपये का लोन चुका दिया।
चितकुंवर राव ने बताया कि उनका समूह हर महीने करीब 1 हजार किलो सर्फ पैकेट और 5 हजार साबुन तैयार करता है। तैयार उत्पादों की बिक्री आसपास के 10 गांवों में की जाती है। इस व्यवसाय से समूह को प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जिससे समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में वह बिहान मिशन से सक्रिय रूप से जुड़ी थीं और वर्ष 2023 में उन्हें आरबीके की जिम्मेदारी मिली। अब तक उन्हें सीआईएफ के तहत 60 हजार रुपये तथा आरएफ मद से 15 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। आजीविका मिशन की मदद से उन्होंने अपने सपनों को नया आकार दिया और मेहनत के बल पर सफलता की नई कहानी लिखी।
चितकुंवर राव ने भावुक होकर कहा कि बिहान मिशन ने उनके जीवन में “नया बिहान, नया सफर” लेकर आया है। आज वह और उनके समूह की महिलाएं आर्थिक रूप से समृद्ध और आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

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