सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में इन दिनों सड़क, बिजली, पानी या राजनीति से ज्यादा एक ही सवाल गूंज रहा है— “आखिर इतनी जल्दी क्या थी?”
जिस कलेक्टर ने विकास कार्यों को फाइलों से निकालकर गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिश की, उसे अचानक इतनी तेजी से हटाए जाने पर अब आम जनता से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।
लोग हैरान हैं कि जिस सिस्टम में एक सामान्य आवेदन महीनों तक सरकारी दफ्तरों की धूल फांकता रहता है, वहां एक कलेक्टर का ट्रांसफर 24 घंटे के भीतर बिजली की रफ्तार से कैसे हो गया? चौराहों और चाय की दुकानों पर अब तंज भी सुनाई देने लगे हैं—
“लगता है सरकार को डर लग गया कि कहीं जनता को विकास की आदत न पड़ जाए!”
पूर्व कलेक्टर संजय कन्नौजे को जिले में एक सक्रिय और जमीनी अधिकारी के रूप में देखा जाता था। वे उन अफसरों में शामिल नहीं थे जो सिर्फ बैठकों और प्रेजेंटेशन तक सीमित रहें। वे स्कूलों में बच्चों के बीच पहुंचते थे, गांवों का औचक निरीक्षण करते थे, युवाओं से सीधा संवाद करते थे और शिकायतों को सिर्फ सुनते नहीं बल्कि समाधान तक ले जाने की कोशिश भी करते थे। यही वजह रही कि कम समय में उन्होंने प्रशासन को जनता के करीब लाने की छवि बनाई।
कई लोगों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी “गलती” यही थी कि वे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए थे। भारतीय राजनीति की विडंबना भी यही मानी जाती है कि जनता की बढ़ती सराहना कई बार सत्ता के गलियारों में असहजता पैदा कर देती है।
सारंगढ़ जैसा जिला प्रशासनिक रूप से हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। यहां विकास कार्यों से ज्यादा राजनीतिक समीकरणों की चर्चा होती है— कौन किस गुट में है, कौन किस नेता के करीब है, किसे मंच पर आगे कुर्सी मिली और कौन पीछे बैठा। ऐसे माहौल में प्रशासन चलाना आसान नहीं होता, लेकिन कन्नौजे ने जिस संतुलन, संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ काम किया, उसने उन्हें आम जनता के बीच भरोसे का चेहरा बना दिया।
इसी कारण अब लोगों का दर्द सिर्फ एक ट्रांसफर तक सीमित नहीं है। असली चिंता उन योजनाओं को लेकर भी है जिन पर उनकी सीधी निगरानी थी। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि अफसर बदलते ही कई योजनाओं की गति धीमी पड़ जाती है और कई सपने फिर से फाइलों में कैद होकर रह जाते हैं।
फिलहाल जिले की जनता सिर्फ एक जवाब तलाश रही है— आखिर ऐसा कौन-सा “आपातकालीन प्रशासनिक तूफान” आ गया था कि जिले के सबसे चर्चित और सक्रिय कलेक्टर को इतनी जल्द हटाना जरूरी हो गया?
राजनीति और प्रशासन के गलियारों में आज फिर वही पुरानी कहावत चर्चा में है—
“जो अधिकारी जनता के दिल में जगह बना ले… उसका ट्रांसफर शासन की सबसे तेज चलने वाली विकास योजना बन जाता है!”

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