सारंगढ़। महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर जिला महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती बैजयंती नंदू लहरे ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्मचिंतन और समाज सेवा के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।
श्रीमती लहरे ने अपने उद्बोधन में कहा कि महात्मा फुले को केवल उनके द्वारा स्थापित संस्थाओं और आंदोलनों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज में आत्मविश्वास और आशा की नई ज्योति जलाने के लिए भी सदैव याद किया जाएगा। उनके विचारों का प्रभाव आज भी समाज के हर वर्ग में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1827 में महाराष्ट्र के एक साधारण परिवार में जन्मे महात्मा फुले ने प्रारंभिक कठिनाइयों के बावजूद शिक्षा और समाज सेवा के मार्ग को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि व्यक्ति को हर परिस्थिति में मेहनत करते रहना चाहिए, निरंतर ज्ञान अर्जित करना चाहिए और समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।
बैजयंती लहरे ने विशेष रूप से महात्मा फुले के शिक्षा के प्रति समर्पण को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे समय में लड़कियों और वंचित वर्गों के लिए स्कूल खोले, जब समाज का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा से वंचित था। उनका मानना था कि ज्ञान किसी एक वर्ग की संपत्ति नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जिसे सभी तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि महात्मा फुले ने यह भी बताया कि बच्चों के संस्कारों में मां की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए शिक्षा की शुरुआत लड़कियों से होना आवश्यक है। शिक्षा को सामाजिक न्याय और समानता का सशक्त माध्यम बनाने का उनका दृष्टिकोण आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।
कार्यक्रम के माध्यम से श्रीमती बैजयंती लहरे ने महात्मा फुले के विचारों को आगे बढ़ाने और समाज में शिक्षा व समानता के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

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