छत्तीसगढ़ में सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित संजय पार्क में वन विभाग की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत हो गई।

इस घटना ने न केवल वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि विभागीय व्यवस्था की पोल भी खोल दी है।

जानकारी के मुताबिक, 21 मार्च को वन विभाग द्वारा संचालित संजय पार्क में यह भयावह घटना घटित हो गई, लेकिन जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। बताया जा रहा है कि 4-5 आवारा कुत्ते पार्क की सुरक्षा घेराबंदी को पार कर अंदर घुस आए और हिरणों के सुरक्षित माने जाने वाले बाड़े तक पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने छोटे-बड़े हिरणों पर हमला कर उन्हें मार डाला। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान न तो कुत्तों के भौंकने की आवाज और न ही हिरणों की चीख-पुकार किसी जिम्मेदार तक पहुंची।
घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश भी सामने आई है। 15 में से 14 हिरणों के शवों को आनन-फानन में जला दिया गया, जबकि एक बड़े हिरण के शव का करीब 48 घंटे बाद पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया गया, जिससे पूरे मामले का खुलासा हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि डीएफओ अभिषेक जोगावत ने की है। उन्होंने प्रारंभिक तौर पर विभाग और पार्क प्रबंधन की लापरवाही स्वीकारते हुए एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित की है, जिसे दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा संभाग के मुख्य वन संरक्षक ने डिप्टी रेंजर सहित चार वन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। संजय पार्क, जो वर्षों से वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय माना जाता रहा है, वहीं अब इस तरह की घटना ने उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा इस कड़वी सच्चाई को भी उजागर करता है कि जिन बेजुबान जानवरों को सुरक्षा के लिए बाड़ों में रखा गया था, वे शायद जंगल में ही ज्यादा सुरक्षित थे।
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