“खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी को मिली रफ्तार” : पारदर्शिता के साथ विकास, लेकिन पर्यावरण को लेकर बढ़ी चिंता…
सारंगढ़। जिले में खनिज संपदा के व्यवस्थित दोहन और राजस्व वृद्धि को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कार्यालय की खनिज शाखा ने ई-नीलामी प्रक्रिया को तेज करते हुए चिन्हित खनिज ब्लॉकों की संशोधित जानकारी जारी कर दी है। यह कार्रवाई संचालनालय भौमिकी तथा खनिजकर्म, नवा रायपुर के निर्देशों के परिपालन में की गई है।
जारी पत्र के अनुसार, जिले के प्रमुख खनिज ब्लॉक—खैराहा, कुटेला-दुर्गापाली एवं खमराडीह—से संबंधित पूर्व में प्राप्त प्रतिवेदन तथा जिला स्तरीय सैंड स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के आधार पर संशोधित विवरण तैयार किया गया है। इन आंकड़ों को वन एवं राजस्व अभिलेखों के गहन मिलान के बाद अंतिम रूप दिया गया है।
खनिज ब्लॉकों का विस्तृत विवरण:
खैराहा ब्लॉक (ग्राम चंदाई, जुनाडीह, खैराहा, राफागुला)
GIS अनुसार रकबा: 205.806 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड अनुसार रकबा: 212.062 हेक्टेयर
कुटेला–दुर्गापाली ब्लॉक (ग्राम हरिहरपाली, कुटेला, खम्हारडीह)
GIS अनुसार रकबा: 82.252 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड अनुसार रकबा: 89.583 हेक्टेयर
खमराडीह ब्लॉक (ग्राम भैंसथान, भोजपुर, गाताडीह, खम्हारडीह, कुटेला, पचपेड़ी, सुलोनी)
GIS अनुसार रकबा: 423.914 हेक्टेयर
राजस्व रिकॉर्ड अनुसार रकबा: 428.010 हेक्टेयर
प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ई-ऑक्शन प्रक्रिया के दौरान पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा सभी अभिलेख अद्यतन रखे जाएं, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि या विवाद की स्थिति न बने।
खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, संशोधित आंकड़ों के आधार पर आगामी ई-नीलामी प्रक्रिया को गति दी जाएगी। इससे शासन को राजस्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। ई-नीलामी प्रणाली से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहेगी।
हालांकि, इस विकास के साथ एक चिंता भी उभरकर सामने आ रही है। जहां एक ओर खनिज दोहन से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और विकास को गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण पर इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता व्याप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित खनन से प्रदूषण बढ़ सकता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
कुल मिलाकर, जिले में खनिज संसाधनों के दोहन की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, लेकिन विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच संतुलित रणनीति अपनाना अब प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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