छत्तीसगढ़ के भारतमाला मुआवजा घोटाला मामले में आज लंबे समय से फरार चल रहे निलंबित एसडीएम निर्भय साहू ने रायपुर की विशेष अदालत (एसीबी/ईओडब्ल्यू) में आत्मसमर्पण कर दिया।

जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर 30 मार्च तक 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही सोमवार (16 मार्च) को ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई करते हुए 23.35 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं। प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने सिंडिकेट के मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनुजा और अन्य आरोपियों से जुड़ी संपत्तियों को कुर्क किया है। हाल ही में फरार तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा और एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गई है।
तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू पर आरोप है कि उन्होंने रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान फर्जीवाड़ा कर मुआवजे की राशि का दुरुपयोग किया। जांच में पाया गया कि निभर्य साहू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थ पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य सहयोगियों के साथ मिलीभगत कर घोटाले को अंजाम दिया था।जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले में राजस्व विभाग के अधिकारियों (एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी) और निजी बिचौलियों का एक बड़ा नेटवर्क शामिल था, जिसने करीब ₹27.05 करोड़ का गबन किया।
इस दौरान अभनपुर तहसील के ग्राम नायकबांधा, उगेटरा, उरला, भेलवाडीह और टोकरो की प्रभावित भूमि को बैक-डेट में कई खंडों में विभाजित किया। इसके माध्यम से वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक राशि का वितरण किया गया ।इतना ही नहीं, पहले से अधिग्रहित भूमि को भी दोबारा अधिग्रहण दिखाकर मुआवजा वितरित किया गया, जिससे शासन को करोड़ों का नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी के अनुसार आरोपित निर्भय साहू की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से निरस्त हो चुकी थी और उसके खिलाफ विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट भी जारी था। इसके बावजूद आरोपित एसडीएम लगातार लंबे समय से फरार चल रहा था।
ईडी की रायपुर जोनल ऑफिस की जांच में सामने आया है कि, रायपुर-विशाखापट्टनम नेशनल हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। इस मामले की शुरुआती जांच एसीबी /ईओडब्ल्यू की तरफ से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी।जांच में खुलासा हुआ है कि, जमीन दलालों, निजी व्यक्तियों और कुछ सरकारी अधिकारियों ने मिलकर साजिश रची। जमीनों को फर्जी तरीके से छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर वास्तविक मुआवजे से कई गुना अधिक रकम हासिल की गई।
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