“नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में रचा इतिहास, अब जरूरी है बराबरी का अधिकार” – ममता राजीव सिंह
सारंगढ़।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष ममता राजीव सिंह ने महिलाओं के संघर्ष, पराक्रम और समाज में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास और वर्तमान दोनों ही नारी शक्ति की महान उपलब्धियों से भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को सच्चे मन से सम्मान देने और उन्हें पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता है।
अपने संदेश में ममता राजीव सिंह ने कहा कि कौन भूल सकता है माता जीजाबाई को, जिनकी शिक्षा और संस्कारों ने छत्रपति शिवाजी महाराज को महान देशभक्त और कुशल योद्धा बनाया। इसी तरह शहीद भगत सिंह की माता विद्यावती का त्याग भी प्रेरणादायक रहा, जिन्होंने कहा था कि यदि उनकी कोख से एक और भगत सिंह जन्म लेता तो वह उसे भी देश के लिए समर्पित कर देतीं।
उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में रज़िया सुल्तान, चाँद बीबी, रानी लक्ष्मीबाई और अहिल्याबाई होल्कर जैसी वीरांगनाओं ने अद्भुत शौर्य, वीरता और समर्पण का परिचय दिया है। वहीं स्वतंत्रता संग्राम में एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू, विजयलक्ष्मी पंडित और आजाद हिंद फौज की कैप्टन लक्ष्मी सहगल का योगदान भी अविस्मरणीय है।
ममता राजीव सिंह ने कहा कि आधुनिक भारत में भी महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवाया है। प्रशासन में किरण बेदी, अंतरिक्ष में कल्पना चावला, खेल जगत में सानिया मिर्ज़ा, सायना नेहवाल, पी. वी. सिंधु और पी. टी. उषा ने देश का नाम रोशन किया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में प्रतिभा पाटिल, इंदिरा गांधी, सुमित्रा महाजन, मीरा कुमार, सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, सोनिया गांधी और द्रौपदी मुर्मू जैसी महिलाओं ने देश के नेतृत्व और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वहीं साहित्य के क्षेत्र में महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, अमृता प्रीतम और मृदुला गर्ग जैसी विभूतियों ने अपनी प्रतिभा और लेखन से समाज को नई दिशा दी है।
अंत में ममता राजीव सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वर्ष में एक बार महिलाओं के पराक्रम, वीरता और महत्व को याद किया जाता है और उन्हें सम्मानित किया जाता है। लेकिन वास्तविक आवश्यकता इस बात की है कि समाज में हर दिन महिलाओं के प्रति सच्चा आदर और श्रद्धा का भाव रखा जाए तथा उन्हें पुरुषों के समान अधिकार और अवसर प्रदान किए जाएं, तभी एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण संभव होगा।
