सारंगढ़। भारतीय राजनीति में सुचिता, नैतिकता और प्रखर वाकपटुता की जब भी बात होगी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती वैजयंती नंदू लहरे ने सुषमा स्वराज के कृतित्व को याद करते हुए उन्हें भारतीय राजनीति में ‘शुचिता का पर्याय’ बताया है।

नेता प्रतिपक्ष के रूप में अद्वितीय भूमिका
वैजयंती लहरे ने कहा कि सुषमा स्वराज ने वर्ष 2009 से 2014 तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में जो भूमिका निभाई, वह संसदीय इतिहास में मिसाल है। उनका मानना था कि विपक्ष का काम केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाना और जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से सदन में उठाना है। अपनी तर्कशक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से उन्होंने इस पद की गरिमा को एक नई ऊंचाई दी।
दलगत राजनीति से ऊपर ‘राष्ट्रहित’ सर्वोपरि-
श्रीमती लहरे ने रेखांकित किया कि सुषमा जी सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की पक्षधर थीं। जब भी विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति या किसी आपात स्थिति का होता, वे दलगत राजनीति के घेरे से बाहर निकलकर हमेशा ‘राष्ट्रहित’ को प्राथमिकता देती थीं। उनकी यही संवेदनशीलता उन्हें एक जननेता बनाती थी।
महिला सशक्तिकरण और प्रभावी नेतृत्व का प्रतीक
सुषमा स्वराज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के महत्वपूर्ण पद पर आसीन होने वाली पहली पूर्णकालिक महिला नेता थीं। वैजयंती लहरे के अनुसार, उनका कार्यकाल भारतीय राजनीति में महिला नेतृत्व की सशक्त उपस्थिति का प्रतीक है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि महिलाएँ संसदीय राजनीति के उच्चतम स्तर पर न केवल नेतृत्व कर सकती हैं, बल्कि सरकार को महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर कठोर प्रश्नों के कटघरे में खड़ा करने का साहस भी रखती हैं।
अंत में वैजयंती लहरे ने कहा कि सुषमा स्वराज का जीवन और उनका राजनीतिक सफर आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज है। वास्तव में, वे भारतीय राजनीति की शुचिता का वह चेहरा हैं, जिनकी कमी सदैव खलती रहेगी।
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