प्रशासन की ‘आंखों’ में पत्थर, कटंगपाली की सड़कों पर बिछा मौत का जाल!खनिज विभाग की साठगांठ या लाचारी?बिना नंबर के ट्रैक्टरों ने राहगीरों का जीना किया मुहाल..
सारंगढ़:
सारंगढ़ क्षेत्र के कटंगपाली में नियम-कानूनों को ताक पर रखकर डोलोमाइट का अवैध परिवहन अब खूनी खेल में बदलता जा रहा है। आलम यह है कि खनिज विभाग के अधिकारी दफ्तरों में चैन की नींद सो रहे हैं और सड़कों पर ‘यमराज’ बनकर ओवरलोडेड ट्रैक्टर दौड़ रहे हैं। बिना तिरपाल ढके पत्थरों के गिरने से आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने मानों मौन व्रत धारण कर लिया है। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा?
कटंगपाली क्षेत्र में डोलोमाइट खदानों से पत्थरों का अवैध और असुरक्षित परिवहन अब आम जनता के लिए काल बन चुका है। खनिज विभाग की कथित ‘अनदेखी’ ने खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे बिना किसी सुरक्षा मानकों के सड़कों पर मौत का सामान ढो रहे हैं।
सड़कों पर बिछी ‘मौत की गिट्टियां’, जिम्मेदार बेखबर
कटंगपाली, बोंदागढ़, जोतपुर और नौघटा, मौहापाली मार्ग पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा है। ओवरलोडेड ट्रैक्टरों से गिरते पत्थरों के बड़े टुकड़े सड़क पर बिखर रहे हैं। रात के अंधेरे में ये पत्थर दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे हैं। विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि शिकायतों के बाद भी सड़कों की सफाई या परिवहन पर रोक लगाने की जहमत नहीं उठाई गई।
कृषि के नाम पर कमर्शियल खेल: राजस्व को करोड़ों का चूना-
क्षेत्र में चल रहे अधिकांश ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पंजीकृत हैं, लेकिन इनका उपयोग धड़ल्ले से डोलोमाइट और पत्थरों के व्यवसायिक परिवहन के लिए किया जा रहा है। यह सीधे तौर पर टैक्स की चोरी और नियमों का उल्लंघन है। परिवहन विभाग और खनिज विभाग की आंखों के सामने यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है, जिससे सरकार को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
बिना नंबर की ट्रॉलियां और बिना लाइसेंस के ‘पायलट’-
हैरानी की बात यह है कि इन ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों में न तो नंबर प्लेट है और न ही चालकों के पास वैध लाइसेंस। कई बार तो नाबालिगों को इन भारी वाहनों को दौड़ाते देखा जा सकता है। नंबर प्लेट न होने के कारण हादसे के बाद इन वाहनों की पहचान करना नामुमकिन हो जाता है। जब कोई ग्रामीण इसका विरोध करता है, तो माफिया के गुर्गे मारपीट और गाली-गलौज पर उतारू हो जाते हैं।
अधिकारियों का वही रटा-रटाया जवाब-
जब इस गंभीर समस्या को लेकर सहायक खनिज अधिकारी से बात की जाती है, तो उनका जवाब किसी ‘स्क्रिप्ट’ की तरह होता है— “मामले की जांच की जाएगी, टीम भेजी जा रही है।” सवाल यह उठता है कि आखिर यह जांच कब पूरी होगी? क्या प्रशासन किसी बड़ी सड़क दुर्घटना और जनहानि का इंतजार कर रहा है?
बड़ी बात-
क्षेत्र की जनता अब इस गुंडागर्दी और प्रशासनिक मिलीभगत के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही है। यदि जल्द ही इन अवैध ट्रैक्टरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो स्थिति भयावह हो सकती है।

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