सारंगढ़। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 पर राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में जिला पंचायत सदस्य बिनोद भारद्वाज ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस बजट को आम जनता की उम्मीदों के विपरीत बताते हुए इसे “जनविरोधी और असंतुलित” करार दिया है।

चुनिंदा राज्यों और कॉरपोरेट का बजट-
बिनोद भारद्वाज ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह बजट देश के विकास के लिए नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा राज्यों को खुश करने और कॉरपोरेट घरानों के हितों को साधने के लिए बनाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ जैसे संसाधन समृद्ध राज्य की अनदेखी की है।
”छत्तीसगढ़ देश को कोयला, बिजली, स्टील और खनिज संपदा देकर राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है, लेकिन बदले में केंद्र की ओर से हमें हमेशा उपेक्षा ही मिलती है।” — बिनोद भारद्वाज, जिपं सदस्य
बजट की प्रमुख खामियां:
भारद्वाज के नजरिए से
भारद्वाज ने बजट के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:
मिडल क्लास को निराशा: महंगाई से जूझ रहे मध्यम वर्गीय परिवारों और गरीबों के लिए बजट में कोई राहत नहीं दी गई है। आयकर (Income Tax) की स्लैब में किसी बड़ी छूट का अभाव निराशाजनक है।
रोजगार का अभाव: बेरोजगारी चरम पर है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन (Job Creation) को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप या ठोस नीति दिखाई नहीं देती।
क्षेत्रीय भेदभाव: बजट में क्षेत्रीय असंतुलन साफ झलकता है, जहाँ कुछ राज्यों को विशेष तवज्जो दी गई है और छत्तीसगढ़ को हाशिए पर धकेल दिया गया है।
आंकड़ों की बाजीगरी: भारद्वाज के अनुसार, यह बजट केवल “आंकड़ों का खेल” है, जिसकी नीतियां जमीनी हकीकत और आम आदमी की समस्याओं से कोसों दूर हैं।
बिनोद भारद्वाज ने अंत में कहा कि गिरती क्रय शक्ति और बढ़ती महंगाई से त्रस्त जनता को इस बजट से जो उम्मीदें थीं, वे पूरी तरह से टूट चुकी हैं। यह बजट विकास का दावा तो करता है, लेकिन हकीकत में यह आम जनमानस को और अधिक संकट में डालने वाला दस्तावेज साबित होगा।
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