“मुर्दों के पेट का ‘राशन’ डकार गए भ्रष्टाचार के सौदागर”बरमकेला में 8.69 लाख का बड़ा घपला उजागर!
सारंगढ़-बिलाईगढ़। भ्रष्टाचार जब मानवीय संवेदनाओं को कुचल देता है, तो वह कितना वीभत्स हो सकता है, इसका जीता-जागता प्रमाण बरमकेला के मारोदरहा में देखने को मिला है। यहाँ एक शासकीय उचित मूल्य की दुकान में गरीबों के हक पर डाका डालने का ऐसा घिनौना खेल खेला गया, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मृतकों के नाम पर राशन का अवैध उठाव कर सरकारी खजाने को 8.69 लाख रुपये की चपत लगाई गई है।
जांच में खुली पोल-
सहायक खाद्य अधिकारी की बड़ी कार्रवाई
बरमकेला के मारोदरहा स्थित उचित मूल्य की दुकान (आईडी: 41200420) की शिकायतों के बाद, सहायक खाद्य अधिकारी ने 13 और 14 दिसंबर 2025 को सघन जांच की। जांच की आंच में दुकान संचालक और विक्रेताओं के काले कारनामे एक-एक कर बाहर आ गए।
मुख्य बिंदु जो जांच में सामने आए-
मृतकों के नाम पर फर्जीवाड़ा:
दुकानदार ने शर्मनाक तरीके से उन लोगों के राशन कार्डों का इस्तेमाल किया जो दुनिया छोड़ चुके हैं। लच्छीराम सिदार, रूपकुंवर डनसेना और राधेश्याम डनसेना जैसे मृतकों के नाम पर लगातार राशन निकाला जाता रहा।
परिजनों को बनाया ‘फर्जी’ हितग्राही:
विक्रेता दिनेश डनसेना (जो उपसरपंच भी है) ने अपने भाई, पत्नी, भतीजे और चचेरे भाइयों के नाम मृतकों के राशन कार्ड में जोड़ दिए ताकि बायोमेट्रिक या अन्य प्रक्रियाओं के जरिए आसानी से राशन हड़पा जा सके।
स्टॉक में भारी हेराफेरी:
भौतिक सत्यापन के दौरान 24.31 क्विंटल चावल और 2.11 क्विंटल शक्कर गायब मिली।
कानून का शिकंजा:
8.69 लाख रुपये की वसूली प्रस्तावित
जांच दल ने पाया कि यह पूरा कृत्य छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का सीधा उल्लंघन है।
“कुल 8,69,699.88 रुपये की वसूली प्रस्तावित की गई है। शारदा महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष, सचिव और मुख्य आरोपी विक्रेता दिनेश डनसेना के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।”
भ्रष्टाचार का मकड़जाल
यह केवल एक दुकान का मामला नहीं है। शारदा महिला स्व सहायता समूह द्वारा संचालित गोबरसिंघा की दुकान में भी भारी मात्रा में अपयोजित खाद्यान्न पाया गया है। इससे साफ है कि गरीबों के निवाले को छीनने का यह धंधा बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा था।
हमारा नजरिया-
सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का दावा करने वाला सिस्टम आखिर इन ‘सफेदपोश लुटेरों’ को रोकने में विफल क्यों रहता है? मृतकों के नाम पर राशन उठना न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि उन मृतकों की आत्मा का अपमान भी है। उम्मीद है कि प्रशासन केवल वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे भेजकर एक नजीर पेश करेगा।
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