बरमकेला : उप सरपंच चुनाव विवाद केस वापस लेने बनाया जा रहा दबाव!आदिवासी शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी?कोरे कागजों पर कराये जबरन हस्ताक्षर..!उपसरपंच समेत 12 लोगों के विरुद्ध थाने मे रिपोर्ट दर्ज..
सारंगढ़। बरमकेला जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मारोदरहा के बहुचर्चित उप सरपंच चुनाव घोटाला को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गहराने के साथ साथ खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। आरोप है कि उप सरपंच दिनेश डनसेना के खिलाफ चल रहे मामले में शिकायतकर्ता को लगातार केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा तथा जंगल ले जाकर जान से मारने की धमकी दी जा रही और जिसकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
SDM न्यायालय में चल रहा मामला-
शिकायतकर्ता के अनुसार, उप सरपंच दिनेश डनसेना पर चुनाव के दौरान धनबल का उपयोग कर जीत हासिल करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता विद्याधर बरिहा ने किए गए शिकायत में आरोप लगाया था कि चुनाव जीतने के लिए 8 पंचों को 1-1 प्लैटिना बाइक दिया गया था और धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी करवाया गया था, जिस पर सुनवाई एसडीएम कोर्ट में जारी है।
पेशी जाने के दौरान रास्ते में घेरकर धमकी
शिकायतकर्ता विद्याधर ने बताया कि गुरुवार को वे इसी मामले की पेशी में शामिल होने बरमकेला पहुँचे थे। इस दौरान उप सरपंच और उनके साथियों ने उनका पीछा किया और रास्ते में घेर लिया। आरोप है कि उन्होंने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा तथा जंगल ले जाकर जान से मारने की धमकी दी और कोरे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। घटना से भयभीत होकर विद्याधर बरिहा अपने सहयोगी खितीभूषण पटेल के साथ अगले दिन बरमकेला थाना पहुँचे। लेकिन यहां भी उप सरपंच और उनकी टीम ने पीछा किया और थाने के भीतर ही उनके साथ छीना-झपटी की।
उपसरपंच सहित 12 लोगों के खिलाफ थाने में रिपोर्ट
विद्याधर बरिहा और उनके सहयोगी खितीभूषण ने इस मामले की लिखित शिकायत थाना बरमकेला में दर्ज कराई है। इसमें सरपंच पति टेकलाल सिदार, उप सरपंच दिनेश डनसेना, शक्राजीत साहू, गंधर्वी चौहान, जगदीश डनसेना, तेजकुमार डनसेना, मालिकराम साहू, संजय सिदार, संतोष साहू, बलभद्र पटेल, अशोक पटेल, लोचन बरिहा समेत कुल 12 लोगों को नामजद रिपोर्ट किया गया है।
दहशत के साए में शिकायतकर्ता
विद्याधर बरिहा ने बताया कि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं और इस कारण वे भय के माहौल में जी रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।
उप सरपंच और उनके समर्थकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उनके द्वारा खुलेआम दबंगई की जा रही है। आखिर उन्हें ऐसा कौन सा संरक्षण मिला है कि वे न तो कानून से डर रहे हैं और न ही प्रशासन से? बहरहाल अब देखना है लाजिमी होगा कि इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या कार्यवाही होगी?

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