छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव एक साथ हो रहे हैं। शहरों में चुनावी शोर थम चुका है तो वहीं पंचायतों में सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। प्रदेश में निर्विघ्न चुनाव कराने के लिए आदर्श आचार संहिता के बीच शासकीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है, लेकिन अब सरकारी कर्मचारी ही इसका खुलेआम उल्लंघन करते नजर आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के सिमगा विकासखंड में सहायक ग्रेड -2 पद पर तैनात कर्मचारी ना सिर्फ अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा रहे हैं, बल्कि खुद भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की है।
CG Panchayat Chunav मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला सिमगा विकासखंड के किरवई ग्राम पंचायत का है। यहां के रहने वाले उमेश सायतोड़े की पत्नी अन्नपूर्णा सायतोड़े सरंपच के पद के लिए चुनाव लड़ रही है। उमेश सायतोड़े विकासखंड के ही चक्रवाय हाईस्कूल में सहायक ग्रेड -2 क्लर्क के पद पर पदस्थ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उमेश सायतोड़े तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर खुद चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने गलत तरीके से अवकाश लिया है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सरपंच प्रत्याशी के पति उमेश सायतोड़े ग्रामीणों के साथ लगातार बैठक कर रहे हैं और प्रलोभन देकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को मतदान से पहले एक लाख रुपए देने की बात भी कही है। कलेक्टर से की गई शिकायत ग्रामीणों ने सबूत के रूप में वीडियो क्लिप भी सौंपा है।
क्या कहता है नियम
बता दें कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक सरकारी अफसर या कर्मचारियों के न सिर्फ चुनाव लड़ने, बल्कि किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने तक पर रोक रहती है। कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक रैली में भी शामिल नहीं हो सकता। कोई भी सरकारी कर्मचारी तभी ऐसा कर सकता है, जब उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया हो।
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