बरमकेला। समाजसेवी चेम्बर ऑफ़ कामर्स के अध्यक्ष संग विभिन्न संगठनों से जुड़े रतन शर्मा जो गत कई वर्षों से जन सेवा के कार्य में जुड़े हुए हैं और लोगों की सेवा करके आत्म संतुष्टि एवं आनंद का अनुभूति कर रहे हैं । आज के इस दौर में सब आगे बढ़ने की होड़ में इस कदर लगे हुए हैं की परोपकार सा सबसे पुण्य काम को भूलते चले जा रहे हैं। इंसान मशीन बन गया है, परोपकार, करुणा, उपकार जैसे शब्दों को जैसे भूल सा गया है। चाहे हम कितना भी धन कमा ले परन्तु यदि हमारे अन्दर परोपकार की भावना नहीं है तो सब व्यर्थ है,मनुष्य का इस जीवन में अपना कुछ भी नहीं है , वह अपने साथ यदि कुछ लाता है तो वे उसके अच्छे कर्म ही होते हैं । सबसे बढ़कर यदि कुछ होता है तो वो है परोपकार की भावना और यह कहना गलत नहीं होगा कि यह सबसे बड़ा धर्म है । इसलिए परोपकार की भावना हम सबके अन्दर होनी चाहिए और हमे अपने अगले पीढ़ी को भी इससे भलीभांति परिचित कराना चाहिए । हमे बच्चों को शुरू से यह सिखाना चाहिए कि – सदैव जरुरतमंदों की मदद करें और यही जीवन जीने का असली तरीका है । समाज में हमारे छोटी सी मदद से कोई अच्छा जीवन व्यतीत कर सकता है तो क्यों न हम इसे अपनी आदत बना लें और समाज के कल्याण का हिस्सा बने। हमारे छोटे-छोटे योग दान से हम जीवन में कई अच्छे काम कर सकते हैं ।

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