सारंगढ़ मे निर्माणाधीन भड़िसार बांध की डीपीआर विरूद्ध निर्माण.. जिला जनसमस्या शिविर में उठा मामला..
सारंगढ़ । छग राज्य सरकार ने कृषकों को सिंचाई सुविधा हेतु भड़िसार जलाशय के निर्माण स्वीकृत किया है जो वर्तमान में निर्माणाधीन है।किन्तु वर्तमान ठेकेदार एवं विभागीय अधिकारी निम्न बिन्दुओं पें अनियमितता बरत रहे है । डीपीआर. के विरूद्ध बांध का निर्माण सीधा या धनुषाकार न होकर सर्पाकार टेंडा मेड़ा किया जा रहा है ।बांध निर्माण में अच्छी गुण वत्ता युक्त मिट्टी न डालकर रेतीली, पथरीली, बरन मिट्टी से किया जा रहा है , जो वर्षा काल में नजर आ रहा है साथ ही खनिज विभाग से बिना अनुमति गुणवत्ताहीन मिट्टी का खनन कर उपयोग में लाया जा रहा है। बांध निर्माण प्रगतिरत होने से पूर्ण रूप से जल भराव नही हुआ है। उसके विपरीत सडारी नाला के भड़िसार वाले दिशा में भारी मात्रा में सीपेज हो रहा है । जिससे यह स्पष्ट है कि – बांध का मेड अभी से कमजोर और गुणवत्ताहीन है जिससे जलाशय निर्माण उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पा रही है ।
उक्त जलाशय निर्माण के पूर्व ग्राम भड़िसार के द्वारा सिंचाई का व्यवस्था, जलाशय रूप में जनसहयोग से किया जाकर सूखे के स्थिति में सिंचाई व्यवस्था किया जाता रहा जो वर्तमान में ठेकेदार विभाग द्वारा पुलिया निर्माण पूर्ण कर लिया गया है जिस पर गेट नहीं लगने से वर्तमान सीजन में जलभराव नहीं होने से सिंचाई व्यवस्था नहीं हो पायेगी जो सूखे पड़ने पर क्षेत्र के कृषकों का वर्ष भर का फसल नष्ट हो सकता है। डेम निर्माण में वेस्ट वेयर की उंचाई ग्राम भकुर्रा की ओर ज्यादा है और दूसरा छोर भड़िसार की ओर उंचाई कम है । जिसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सड़क बांध पूर्णता के बाद जलभराव से डूब जायेगा और आवागमन अवरूद्ध हो जायेगा जिसके लिए विभाग ठेकेदार द्वारा क्या व्यवस्था किया गया है जिससे हमारा आवागमन बाधित न हो हम आज तक अनभिज्ञ है।
विदित हो कि – बांध के ऊपर से भड़िसार सुवरगुड़ा 11 हजार केवी विद्युत पोल सप्लाई है , जिसकी समुचित व्यवस्था विस्थापन अभी तक विभाग, ठेकेदार द्वारा पहल नहीं किया गया है, जो भविष्य में समस्या हो सकती है। जिला जनसमस्या निवारण शिविर में यह आवेदन राकेश पटेल के द्वारा कलेक्टर धर्मेश साहू को सौंपते हुए निवेदन किया गया है कि – संबंधित विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए बिन्दूवार जांच कराते हुए डी.पी.आर. अनुरूप मजबुत बांध का निर्माण तथा सिंचाई व्यवस्था के साथ आवागमन व विद्युत विस्थापन कार्यों की व्यवस्था कराई जावे जिससे कृषकों को भविष्य में किसी प्रकार की समस्याओं का सामना ना करना पड़े ।
