जगन्नाथ बैरागीरायपुर।छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से भूचाल आने वाला है. सूत्रों की मानें तो सितंबर महीने के आखिरी सप्ताह में राहुल गांधी छत्तीसगढ़ का दौरा कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के मुखिया मोहन मरकाम ने बताया है कि राहुल गांधी की ओर से बस्तर और सरगुजा संभाग के दौरे की सहमति मिल गई है. मीडिया से चर्चा के दौरान मोहन मरकाम ने कहा कि पार्टी सर्वोपरी होती है, मैं न तो भूपेश बघेल के साथ हूं और न टीएस सिंहदेव के साथ हूं. पार्टी का कार्यकर्ता हूं और फिलहाल संगठन में पालक की भूमिका में हूं.चुनाव आते जाते हैं, पार्टी का काम सतत चलता रहता है. मुख्यमंत्री बदलने की अटकलों को लेकर मरकाम ने कहा कि आप कुछ भी कयास लगा सकते हैं लेकिन पार्टी आलाकमान जो तय करता है, पार्टी उसी हिसाब से चलती है.आलाकमान ने बयानबाजी से किया मनासूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी मुख्यमंत्री को लेकर चल रही चर्चा को अपने इस दौरे में बाद विराम लगा देंगे. कांग्रेस हाईकमान ने भूपेष बघेल औऱ टीएस सिंहदेव दोनों के खेमों को सार्वजनिक रुप से एक दूसरे के खिलाफ बयानबाज़ी करने से मना कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि आने वाले 2-3 दिनों में राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे की तारीख फाइनल कर दी जाएगी.
जल्दी ही राज्य में आ सकता है राजनैतिक भूचालपंजाब के बाद अब छत्तीसगढ में भी कांग्रेस चेहरा बदलने की तैयारी में दिख रही है. वहीं टीएस सिंहदेव भी मौका गंवाना नहीं चाहते लिहाजा वो सोमवार को खुद दिल्ली दौरे पर थे, जिसके अगले दिन मंगलवार को गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल से दिल्ली में मुलाकात की थी. इसके बाद माना जा रहा है कि जल्दी ही छत्तीसगढ़ में राजनैतिक भूचाल आने वाला है.बघेल नहीं चाहते बदलाव होसूत्रों के मुताबिक इसे लेकर भूपेश बघेल औऱ उनका खेमा राज़ी नहीं है. भूपेश बघेल के निवास पर मंगलवार को बस्तर संभाग के विधायक इकट्ठा हुए थे जबकि बीते हफ्ते भी कई विधायकों के जुटने की खबर आई थी. हालांकि इसे लेकर मोहन मरकाम का कहना है कि कई विधायक अपनी बात रखने के लिए मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं इसमें गलत क्या है.हाईकमान है इस बार अलग मूड़ मेंसंभावना है कि एक बार फिर से मुख्यमंत्री भूपेष बघेल राहुल गांधी को अपनी ताकत का एहसास कराएंगे, लेकिन इस बार हाईकमान अलग मूड़ में नज़र आ रहा है. जानकार बताते हैं कि 2018 में चुनाव परिणाम आने के बाद ढ़ाई ढ़ाई साल का एक फॉर्मूला तय हुआ था, जिसके हिसाब से ढ़ाई साल पूरे होने पर भूपेश बघेल को टीएस सिंहदेव को सत्ता सौंपनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.अब जब हाईकमान की ओर से दवाब बढ़ा तो खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल औऱ उनके समर्थक विधायकों ने दिल्ली जाकर शक्तिप्रदर्शन करने की कोशिश की, हालांकि इस बात से कांग्रेस हाईकमान नाराज़ भी हो गया था. अब राहुल गांधी के बस्तर और सरगुजा आने की तैयारी है, ऐसे में आने वाले कुछ दिनों में छत्तीसगढ़ राजनैतिक तौर पर एक अस्थिरता के दौर से गुज़र सकता है.

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