जगन्नाथ बैरागी

रायगढ़। सारंगढ़ में एक तरफ पूरी तरह से शराब पर प्रतिबंध लगाने अमित शुक्ला ने अपनी टीम को निर्देशित किया है तो वहीं पँचायत के संरक्षण में ग्राम फर्सवानी में शराब की गंदी नदी बहने से गांव का माहौल खराब हो रहा है। लोग सुबह से शाम तक शराब के नशे में डूबने को मजबूर हो रहे हैं और पँचायत के मुखिया की मौन सहमति इसका सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है।



25 से 30 रुपया प्रति पाऊच बिक रहा शराब:-
एक तरफ सरकारी शराब दुकान में रेट 80 रुपया प्लेन शराब का मिल रहा है तो वहीं फर्सवानी में 25 से 30 रुपये में आसानी से शराब उपलब्ध हो जा रही है। शराब प्रेमी शहर आने-जाने के खर्चे में ही यहां 2 पाव शराब आसानी से लेकर शामे रंगीन करना बेहतर समझ रहे हैं।
फर्सवानी में प्रतिदिन सैकड़ों लीटर कच्ची महुवा शराब की खपत का अंदेशा-
सूत्रों की माने तो सिर्फ एक ही गांव में रोजाना सैकड़ों लीटर कच्ची शराब की खपत होती है। इससे कच्ची शराब के पीने वालों की तादात का पता आसानी से लगाया जा सकता है। औऱ शराब के नशे में होने वाले परिवारिक कलह के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है। शराब के लिए पैसे नही होने पर शराबी चावल और घरेलू सामग्री बेचने हेतु कोई कसर नही छोड़ रहे।
1 से 2 घरों में बिकने वाला शराब पहुंच चुका दर्जनों घर-
ग्रामीणों के मुताबिक कोरोना काल से पहले जहां सिर्फ 1 या 2 घरों में अवैध रूप से मिलने वाला महुवा शराब अब दर्जनों घर मे खुलेआम बिकने लगा है। क्योंकि बिना मेहनत के आसानी से पैसा कमाने की चाह में लोग अवैध कार्य करने से भी नही हिचक रहे हैं। क्योंकि लोगों को पैसा कमाने के लिए इससे शार्ट कट रास्ता शायद समझ ही नही आ रहा है।
ग्राम पंचायत के पदाधिकारी जान बुझ कर बन रहे अनजान, इस कारण बड़ रहे अवैध कारोबारियों के हौसले-
ग्रामीणों के अनुसार सरपँच गंगाराम सिदार सहित ग्राम पंचायत फर्सवानी के हर पंचायत पदाधिकारियों को गांव में बिकने वाले शराब के बारे में जानकारी है। लेकिन न तो सरपँच गंगाराम सिदार को ग्रामीणों जी परवाह है न उनके पँचायत के अन्य पंच या अन्य सदस्यों को। और तो और अगर ग्रामीणों की बात सही है तो पँचायत को भी इनके कमाई का एक हिस्सा पहुंचता है इसलिए आज लगभग दर्जनों घर मे बेखौफ होकर कच्ची महुवा शराब बेचा जा रहा है। और प्रत्येक शराब बेचने वाले घर से कुछ बड़े पद वालों को फ्री पीने का इंतज़ाम भी हो जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरपँच और ग्राम पंचायत शराबबंदी को लेकर कितने गम्भीर हैं।
शराब कोचिया को बचाने खुद थाने पहुँच जाते हैं पंचायत पदाधिकारी-
सबसे बड़ी सोचने की बात यह है कि जब एक्का दुक्का पुलिसिया कार्यवाही होती है तो पँचायत के उच्च पद में आसीन तथाकथिक पँचायत के बड़े साहब खुद शराब कोचियाओं को बचाने थाने पहुंच जाते हैं। इस स्थिति में ग्राम फर्सवानी के युवाओं का भविष्य किस गर्त में जाने वाला है, कोई भी आसानी से अंदेशा लगा सकता है। यही पँचायत प्रतिनिधि चुनाव से पहले शराबबंदी के लिए बड़े-बड़े दावे ग्रामवासियों से किये थे, लेकिन जब दूध की रखवाली बिल्ली को सौंपा जाये तो दूध का हश्र सबको पता है।
अवैध शराब कोचियाओं और तश्करों को नही बक्शा जाएगा-अमित शुक्ला
जब इस बारे में फोन के माध्यम से टीआई अमित शुक्ला को जानकारी दी गयी तो उनका साफ कहना है कि अंचल के किसी भी ग्राम में शराब तश्कर और शराब कोचियाओं को नही बक्शा जायेगा, उन्होंने जल्द कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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