सारंगढ़: सारंगढ़ के अन्नदाता परेशान! भुइयां साप्टवेयर में त्रुटि का खेल! चढ़ावा संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा? पटवारियों के कार्यालय मे लग रही भारी भीड़, आखिर क्यों ? …

सारंगढ़: कृषि प्रधान सारंगढ़ जिले के किसान परेशान नज़र आ रहे हैँ, कारण भूमि का विवरण कंप्यूटर में फीड करते समय किया गया त्रुटि है जो अब भूमि मालिकों पर भारी पड़ रही है। छोटी छोटी त्रुटियों को दुरुस्त कराने में किसानो को दो से पांच महीने तक तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालयच तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके चलते उनके काम भी लटक रहे हैं। खसरा खतौनी की नकल निकलवाने, भूमि का नक्शा लेने सहित विभिन्न प्रमाण पत्र बनवाने तथा धान विक्रय करने के लिये पंजीयन कराने के लिए आनलाईन रिकार्ड को अपड़ेट कराने के लिये लोग तहसील पहुंचते हैं। इसमें लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही समय की भी बर्बादी होती है । इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार तहसील में अधिकतर व्यवस्थाएं आनलाइन करने की तैयारी कर रही हैं । इसके लिए भूमि संबंधी डाटा कंप्यूटर में फीड किया जा रहा है। किन्तु किसानो का आरोप है कि इसी फीडिंग में जानबूझकर “त्रुटि का खेल’ किया जा रहा हैं। लगभग रोजाना ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। अपनी जमीन के अभिलेखों में ऐसी त्रुटि को दुरुस्त कराने के लिए लोग तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। समाधान न होने पर लोगों को एसडीएम कार्यालय जाना पड़ रहा है। पीड़ितों का कहना है कि इस पूरे त्रुटि के खेल में मिलीभगत की संशय सामने आ रहा है। कई किसानो का आरोप है कि जानबूझ कर ऐसी गलतिया किया जा रहा है ताकि लोगों को उनकी साठगांठ वाले की मदद लेनी पड़े | छोटी छोटी त्रुटियों को ठीक होने में दस दिन से एक महीने तक का समय लग सकता हैं। इनमें लोगों का धन और समय तो बर्बाद होता ही है, बिना किसी अपराध के कोर्ट के चक्कर काटने में फजीहत झेलनी भी पड़ती है। जिसके चलते उनके काम रुक जाते हैं।

चढ़ावा देने मजबूर किसान? पटवारियों के कार्यालय मे चक्कर लगाने बेबस! –
इस संबंध मे मिली जानकारी के अनुसार सारंगढ़ अनुविभाग के तहसील सारंगढ़, बरमकेला, सरिया, उपतहसील कोसीर मे भुटयां साप्टवेयर में किसानो की त्रुटि का मामला सामने आया है। यह त्रुटि को सुधारने का अधिकारी सिर्फ एसडीएम को प्रदान किया गया है। एसडीएम कार्यालय मे प्रस्तुत आवेदन पर पटवारी और तहसीलदार को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश एसडीएम के द्वारा प्रदान किया जा रहा है तथा प्रतिवेदन प्राप्त होने पर त्रुटि संशोधन के लिये आदेश जारी किया जा रहा है। किन्तु इस प्रतिवेदन के खेल मे कई बढ़े चेहरे शामिल हो गये है। बताया जा रहा है भुइयां साप्टवेयर मे त्रुटि होने पर धान पंजीयन की कार्यवाही नही हो पा रही है इस कारण से प्रतिवेदन के खेल मे मनमानी चढ़ावा की संस्कृति को हवा दिया जा रहा है। पटवारियो द्वारा प्रतिवेदन देने मे लेटलतीफ करने और तहसीलदार के पास पेड़िंग केस बढ़ने के कारण से उनका ध्यान इन प्रकरणो की ओर नही है। जिसके कारण से किसानो को काफी ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है। और इसी स्थिति का फायदा उठाकर मोटी रकम का उगाही त्रुटि संशोधन के नाम पर दलालो के द्वारा उठाया जा रहा है।
किसानो ने लगाया पटवारियों पर गंभीर आरोप –
पीड़ित किसानो ने पटवारियो को ही बड़ा जिम्मेदार माना है। आफ-द-रिकार्ड कई किसानो से हुई चर्चा मे उन्होने इस बात पर जोर दिया कि भुइयां साप्टवेयर मे उनका डाटा सही था और कभी भी कोई जमीन ना तो विक्रय किया गया है और ना ही खरीदी किया गया है। ऐसे मे उनके नाम, पिता का नाम या पता या जाति या खसरा नंबर या रकबा नंबर मे परिर्वतन आखिर कैसे हो रहा है? उन्होने इस पूरे त्रुटि कांड का जांच की मांग भी चर्चा के दौरान रखी। कई किसानो ने इस त्रुटि कांड के बहाने उनसे राशी की उगाही करने को इस खेल का मुख्य कारण बताया। कई किसानो ने बताया कि बिना चढ़ावा पटवारी प्रतिवेदन भी नही बना रहे है। पटवारियो के कार्यशैली और प्रतिवेदन के लिये चढ़ावा की शिकायत पर कई किसान चुप्पी साधकर कार्यवाही नही होने के कारण से शिकायत नही करने की जानकारी भी दिया। बहरहाल सारंगढ़ अनुविभाग मे अभी तक एक हजार से अधिक आवेदन भुइयां साप्टवेयर मे संशोधन के लिये आना एक बड़ी समस्या के रूप मे दिख रहा है। चुनावी समय मे भुइयां साप्टवेयर में समस्या आना तथा धान पंजीयन का कार्य इस त्रुटि सुधार के बिना नही हो पाना किसानो के लिये बड़ी चुनौती के सामान है। देखना है कि जिला प्रशासन और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व इस मामले को लेकर कितना संजीदा है और किसानो को इस त्रुटि के लिये कितना परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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