छत्तीसगढ़ मे कॉलेज प्रबंधन का तानाशाही रवैया: फीस नही तो एग्जाम नही कहकर छात्रों को किया बाहर…
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मनकी स्थित संस्कार सिटी फार्मेसी कॉलेज में प्रिंसिपल और प्रबंधन की मनमानी से छात्र-छात्राएं काफी परेशान हो रहे है। कॉलेज में बच्चों के इंटरनल एग्जाम चल रहे हैं, वहीं बच्चों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हुए 75 फीसदी छात्र- छात्राओं को परीक्षा में बैठने ही नहीं दिया गया।
बच्चे कॉलेज के बाहर घंटों इंतजार करते रहे और इंटरनल परीक्षा देने की अनुमति मांगते रहे, लेकिन प्रिंसिपल का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने उन्हें इंटरनल नहीं देने दिया। फीस जमा नहीं होने का हवाला देते हुए बच्चों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया। बच्चों ने इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। परिजनों के कॉलेज पहुंचने के बाद जमकर हंगामा हुआ।
परिजनों से नहीं मिले प्रिंसिपल
परिजनों के पहुंचने के बाद भी प्रिंसिपल और प्रबंधन ने मीटिंग का हवाला देते हुए उनसे मिलने से इनकार कर दिया। बच्चों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन का रवैया तानाशाही है और बच्चों पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाया जाता है। कुछ बच्चों की फीस बाकी होने पर उन्हें 1 दिन के अंदर ही फीस जमा करने के लिए दबाव बनाए जाने लगा और फीस जमा नहीं करने पर उन्हें इंटरनल एग्जाम से वंचित कर दिया गया। चंद उपयोग के लिए कॉलेज प्रबंधन बच्चों के भविष्य को दांव पर लगा रहा है। शिक्षा का व्यापार करने वाले कॉलेज प्रबंधन बच्चों के साथ इस कदर ज्यादती कर रहा है कि 60 में से मात्र 16 बच्चों को एग्जाम दिलाने दिया गया। बाकी बच्चों को अलग-अलग बहाने बनाकर एग्जाम हॉल में घुसने भी नहीं दिया गया। छात्र हिमांचल सोनकर ने बताया कि- 50 प्रतिशत उपस्थिति होने के बावजूद हमें परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया वहीं अट्ठारह प्रतिशत उपस्थिति वाले बच्चों को पहुंच पहचान और एप्रोच के बल पर परीक्षा में बैठने दिया गया। इसकी कुछ रकम बाकी होने के कारण भी कई बच्चों को परीक्षा से वंचित कर दिया गया। उपस्थिति कम होने और नो ड्यूज़ नहीं होने का हवाला देते हुए हमें परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया हम सुबह 10:00 से यहां बैठे हैं लेकिन हमें परीक्षा में बैठने का मौका नहीं दिया गया ऐसे में हमारा बैक लग सकता है और भविष्य भी खराब हो सकता है। जिन बच्चों की पहुंच पहचान है वे प्रिंसिपल से बात करके एग्जाम में बैठ गए।
कॉलेज प्रसाशन ने दी सफाई
परीक्षा में नहीं बैठते दिए जाने पर छात्र छात्राओं के परिजनों ने कॉलेज में जब प्रिंसिपल से बात करनी चाहिए तो पहले तो उन्होंने इंकार कर दिया बाद में परिजनों के हंगामा करने पर प्रिंसिपल बी कुमार और कॉलेज के डायरेक्टर सुनील श्रीवास्तव ने नाराज परिजनों को समझाइश देना शुरू कर दिया। इस संबंध में प्रिंसिपल डी कुमार से पूछा गया तो वे सभी आरोपों से मुंह करते नजर आए और कहां की बच्चों को परीक्षा में बैठने नहीं दिया जा रहा है ऐसी बात नहीं है वेरिफिकेशन चल रहा है जिसकी वजह से परेशानी हुई। मैं आश्वस्त करता हूं कि बच्चों का भविष्य खराब नहीं होगा। लगातार जिले में ऐसी शिकायतें मिलती रही है कि शिक्षा को व्यापार बनाने वाले ऐसे कॉलेजों द्वारा बच्चों से दबाव पूर्वक फीस की वसूली की जा रही है इसके अलावा तानाशाही रवैया से बच्चों और उनके परिजनों को लगातार पर परेशान किया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदारों के द्वारा शिक्षा को व्यवसाय बनाने वालों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसे में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
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