महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ऐसे पंजीकृत मजदूर जो मांगपत्र के माध्यम से जनपद पंचायत सीईओ से काम की मांग करेंगे। उन्हें पन्द्रह दिवस के भीतर ग्राम पंचायत क्षेत्र में काम की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
यदि काम नही मिला तो अगले सोलहवें दिवस से मासान्त तक उन मजदूरों को आधी मजदूरी तथा पहली तारीख से घर बैठे पूरी मजदूरी देने का प्रावधान है। अगर काम मांगने के बाद ग्राम पंचायत क्षेत्र में काम नही है तो दूसरे ग्राम पंचायत में ऐसे मजदूरों को भेजने का नियम है। आने जाने का किराया भी जनपद कार्यालय को देना है। ये अलग बात है की जानकारी के आभाव में आज तक जिले के कोई भी पंजीकृत मजदूर काम नही मिलने की स्थिति में मजदूरी नही पाए हैं।

अलबत्ता काम मिलने पर बिना काम किए मजदूरी जरूर मिल रहा है। अमृत सरोवर का मोनो लगा यह तालाब जिला सूरजपुर जनपद पंचायत रामानुजनगर ग्राम पंचायत भुनेश्वरपुर का है। मनरेगा योजना के तहत छह लाख रुपये की लागत से जून 2022 में तालाब गहरीकरण के काम की स्वीकृति मिली। जब तालाब में पानी था और पूरे वर्ष जल भराव के कारण तालाब की खुदाई का काम नही हुआ। वर्ष 2021 में खोदाई का काम शुरू हुआ। तालाब में गोदी की खोदाई का तस्वीर में साफ साफ दिखाई दे रहा है कि तालाब मेढ़ के नीचे सीढ़ी जैसा निर्माण किया गया है जिसे इसी गहराई को मापक यंत्री द्वारा पूरे तालाब क्षेत्र में खोदाई का मूल्यांकन किया गया होगा जबकि तालाब के मध्य सतह पर पानी के सूखे मिट्टी की पपड़ी जमी हुई है वहां फावड़ा का उपयोग तक नही हुआ है।
अधिकतम अस्सी नब्बे गोदी खोदकर छः लाख रुपये के काम का मूल्यांकन हो गया जो जानकारियां और शिकायतें आम हैं कि काम पर बिना जाए लोगों का हाजिरी बन जाता है। होता यह है की काम करने वाले मजदूर ही काम करते हैं। बाकी सिर्फ पंजीयन करा घर बैठे रहते हैं। रोजगार सचिव के सेटिंग से ऐसे मजदूरों को मजदूरी के कुछ हिस्से को बैंक में छोड़ दिया जाता है और अपना हिस्सा आहरण करा ले लिया जाता है। यह राशि जवाबदेह लोगों के मध्य बंदरबांट हो जाती है। इस प्रकार मनरेगा भी घर बैठे कमाई का अच्छा जरिया बन गया है। आज जिन डबरियों को मॉडल की तरह प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे प्रायः डबरी पहले से छोटा तालाब की संरचना में रहते हैं उन्हीं तालाबों को डबरी के रूप में दिखा दिया जाता है। चालीस पचास हजार का गोदी खोद कर पुराने मेड़ को ढंक नया डबरी बना दिया जाता है। इन सभी अनियमितताओं में मास्टररोल भरने वाले कर्मचारी से लेकर जवाबदेही सभी अधिकारी कर्मचारी संलिप्त रहते हैं। कोई किसी से शिकायत करे फर्क नही पड़ता है। जिला प्रशासन के द्वारा हर पांच साल में ऐसे सभी मजदूरों का सत्यापन करना चाहिए और जो मजदूर काम पर नही जाते हैं उनका पंजीयन भी निरस्त होना चाहिए।
- सारंगढ़ में खेलों का महाकुंभ, 330 खिलाड़ी दिखाएंगे दमखम… - October 2, 2026
- गांधी-शास्त्री जयंती पर छात्राओं को मिला शिक्षा का संबल… - October 2, 2026
- गणपति विसर्जन में दिखी एसपी सुनील शर्मा की सख्ती, शांतिपूर्ण आयोजन ने जीता लोगों का भरोसा… - October 2, 2026
