नए साल में सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को दे सकती है ये 3 बड़े सौगात….
नई दिल्ली. सरकारी कर्मचारियों को नए साल के लिए केंद्र सरकार से कई उम्मीदें हैं. ऐसे में यदि सरकार उनके लिए कोई घोषणा करती है तो यह कर्मचारियों के लिए नए साल में खुशियों का तोहफा साबित होगा.
केंद्रीय कर्मचारियों की सरकार से उनके वेतन को लेकर तीन प्रमुख मांगें हैं. अगर सरकार उन मांगों को पूरा कर देती हैं तो उनके वेतन काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
केंद्र सरकार हर साल की शुरुआत में और साल के मध्य में दो बार कर्मचारियों का DA यानी महंगाई भत्ता बढ़ाती है. इसकी घोषणा थोड़ी बहुत आगे पीछे हो सकती है लेकिन इसे 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू माना जाता है. इसके अलावा कर्मचारी पेंडिंग डीए एरियर बढ़ाने और बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी की भी मांग कर रहे हैं.
इस साल में 7 फीसदी बढ़ाया महंगाई भत्ता
इस साल सरकार ने दिवाली से पहले सितंबर में महंगाई भत्ते में 4 फीसदी बढ़ोतरी की थी जिससे यह 38 फीसदी हो गया था. महंगाई भत्ते में इस बढ़ोतरी को 1 जुलाई से लागू माना गया था. वहीं उससे पहले यह मार्च में बढ़ाया गया था. उस समय सरकार ने 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में 3 फीसदी बढ़ोतरी कर इसे 34 फीसदी कर दिया था.
नए साल में इतनी होगी डीए में बढ़ोतरी
आगामी साल 2023 में कर्मचारियों को महंगाई भत्ते को बढ़ाने की उम्मीद है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार मार्च 2023 में DA और DR में 3 से 5 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है. हालांकि कर्मचारियों इसका लाभ जनवरी से दिया जाएगा. यदि सरकार महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 5 फीसदी की बढ़ोतरी करती है तो ये बढ़कर 43 फीसदी हो जाएगा.
फिटमेंट फैक्टर रिवाइज करने की मांग
केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से फिटमेंट फैक्टर 2.57 फीसदी से बढ़ाकर 3.68 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं. इससे कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये से बढ़कर 26 हजार रुपये हो जाएगी. अगर सरकार नए साल में कर्मचारियों के फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग मानते हुए इसकी घोषणा करती हैं तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी होगी.
18 महीने का पेंडिंग डीए एरियर
कर्मचारियों का जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीनों का डीए एरियर कोविड-19 महामारी के कारण पेंडिंग है. दरअसल, सरकार हर साल 2 बार जनवरी और जुलाई में डीए में बढ़ोतरी करती है लेकिन सरकार ने इस अवधि में कोरोना की वजह से डीए में बढ़ोतरी नहीं की थी. इसलिए कर्मचारी लगातार सरकार से इसे बढ़ाने को लेकर मांग कर रहे हैं.
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