रायगढ़। रायगढ़ जनपद पंचायत पीएम आवास में राशि डकारने वालों से रिकवरी नहीं कर पा रहा है। जनपद के 84 पंचायतों के 70 डिफाल्टरों ने पहली किश्त की राशि लेकर उसे डकार लिया है। जिससे ना तो निर्माण पूरा हो सका है और ना ही किश्त का पैसा हजम करने वाले लोग उसे लौटा रहे हैं।

गरीब वर्ग के लोग जिनके लिए पक्का मकान एक सपना ही रह जाता है ऐसे लोगों को पक्का मकान दिलाने पीएम आवास योजना लाई | इसके तहत पूरे देश में गरीबों के पक्का मकान का सपना पूरा हुआ। रायगढ़ जनपद के 84 ग्राम पंचायतों में भी पीएम आवास के पात्र हितग्राहियों किश्त की राशि दी गई । जिसमें ऐसे 70 लोगों का नाम आया जिन्हें पीएम आवास के नाम पर पहली किश्त की राशि ले तो ली, लेकिन मकान निर्माण ही नहीं कराया।
भले ही शासन ने उन्हें दूसरी और तीसरी किश्त की राशि नहीं दी, लेकिन पहली किश्त के रूप में शासन के लाखों रुपए पानी में डूब गए।अब उक्त हितग्राहियों से रुपए वसूलने माथापच्ची शुरू हो गई है। जनपद पंचायत द्वारा इन डिफाल्टरों की सूचना बना कर एसडीएम को
सॉंप दिया गया है और मामला
एसडीएम न्यायालय में चल रहा
है लेकिन डिफाल्टरों से रुपए वसूली नहीं की जा सकी है।

कुछ की हो गई मौत तो कोई रुपए लेकर फरार
जनपद पंचायत के आवास शाखा से मिली जानकारी के अनुसार इन 70 डिफाल्टरों में कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो गई है और नॉमिनी में किसी का नाम भी नहीं है ।ऐसे में मृतकों के रिश्तेदारों से रुपए वसूलने का कोई चांस ही नहीं है। जबकि कई लोग किश्त की राशि मिलने के बाद गांव छोड़कर अन्य पलायन कर चुके हैं ।ऐसे लोगों को खोज कर उनसे रुपए वसूलना प्रशासन के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है।जबकि बाकी लोग तो खुद गरीब हैं और प्रशासन भी उन पर दबाव नहीं बना रहा है, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है।
2019-20 में मकान निर्माण में आई कमी
शुरुआत में पीएम आवास का काम काफी तेजी से चला | केन्द्र शासन और राज्य शासन द्वारा दी गई राशि से 2016-17 में 98.84 प्रतिशत, 2017-18 में 9872 प्रतिशत, 2018-19 में 98.15 प्रतिशत काम हुए तभी अचानक 2019-20 में 659 मकान स्वीकृत होने के बाद ही 263 मकान ही बन पाए।इस तरह मकान निर्माण का प्रतिशत 39.91 प्रतिशत रहा ।इसका कारण यह बताया जा रहा है कि राज्य शासन के पास फंड नहीं होने से किश्त की राशि अटक गई थी।जोकि इसी साल के अक्टूबर माह से मिलना शुरू हुआ है ।इसी तरह 2020-21 में 597 मकान स्वीकृति होने के बाद भी राशि नहीं मिलने से एक भी निर्माण कार्य नहीं हुए। जबकि 2021-22 और 2022-23 में कोई टारगेट ही नहीं मिला है।
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