अवैध उगाही: सारंगढ़ मे इस जगह पोस्टिंग के लिए दिया जाता है चढ़ावा ? प्रतिदिन 2 लाख से उपर की होती है अवैध उगाही…! नई कलेक्टर है अनजान, पीठ पीछे हो रहा अवैध काम…
रायगढ़ खनीज विभाग की कमाई का अंदाजा आम पब्लिक को लगाना मुश्किल ही नही नामुमकिन है! रायगढ़ जिले मे खनीज सम्पदा की जो लूट मची थी उसकी भनक ना सिर्फ जिले को थी अपितु प्रदेश और देश स्तर मे भी सिक्के की खनक सुनाई दी थी तभी इनकम टैक्स और ईडी का छापा दर्जनों विभाग को छोड़ खनीज विभाग पर पड़ा था। लोगों की माने तो उपर से नीचे तक कोई छोटा से बड़ा कर्मचारी भी नही छूटा है जो अवैध कमाई से घी नही पिया हो। अब गुड़ेली टिमरलगा और कटंगपाली क्षेत्र सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले मे आने से बैठे बिठाए रबड़ी खाने को भले ही ना मिले लेकिन कमाई का तरीका अभी भी पुराने ढर्रे से ही चल रहा है ऐसा सूत्र बता रहे हैँ।
खनिज विभाग पर इनकम टैक्स की रेड पड़े या ईडी की, कोई असर नहीं होता। अवैध उगाही का जो तंत्र है, वह अब भी जारी है। सूत्रों के अनुसार अभी भी टिमरलगा में प्रति गाड़ी 500 रुपए की उगाही हो रही है। बिना टीपी के चलने वाली गाड़ी से यह वसूली की जा रही है। इस काम को अजाम देने के लिए दो साल से एक ही कर्मचारी को टिमरलगा बैरियर में रखा गया है। टिमरलगा खनिज बैरियर हमेशा से खनिज विभाग का अवैध कमाई का सबसे बड़ा सेंटर है। यहां हर दिन दो तीन लाख का गल्ला है। इस रकम में कई अधिकारियों और नेताओं का कमीशन है। अभी भी यही सिलसिला बरकरार है। सभी क्रशर संचालकों को रॉयल्टी पर्ची नहीं मिल रही है। जिनके पास टीपी नहीं है, वे बिना पर्ची के ही गाडिय़ा निकाल रहे हैं।

ऐसी गाडियों को रोकने के लिए ही बैरियर बनाया गया है। जबकि यही गाडिय़ां अवैध उगाही का जरिया बन चुकी हैं। कथित तौर पर रोजाना यहां से करीब 500 गाड़ियां निकल रही हैं। प्रति वाहन 500 रुपए अवैध उगाही का रेट फिक्स है। यहां की जिम्मेदारी खनिज विभाग भी अपने एक विश्वसनीय नगर सैनिक को दे रखी है। यही वसूली का पूरा रैकेट चला रहा है। रोज करीब दो तीन लाख की वसूली हो रही है जो कई जगहों में बांटी जा रही है। क्रशर संचालक भी अवैध पत्थर खनन कर 500 रुपए देकर आसानी से गाड़ी निकाल रहे हैं। सारंगढ़ बिलाईगढ़ नया जिला होने के कारण अब टिमरलगा सबसे बड़ी कमाई का माध्यम बन गया है।

दो साल से तैनात है एक ही नगर सैनिक –
खनिज बैरियर में कभी भी एक ही कर्मचारी को छह महीने से अधिक समय तक नहीं रखा जाता। अवैध वसूली को रोकने के लिए ही ऐसा किया जाता है। टिमरलगा में नगर सैनिक दामोदर चंद्रा को छह छह महीने के तीन टर्म से भी अधिक समय से वहीं रखा गया है। दरअसल पूर्व खनिज अधिकारियों की अवैध वसूली का सबसे बड़ा केंद्र टिमरलगा ही था। यहा से चंद्रा हर महीने लाखों रुपए भेजता था जो कई लोगों में बंटता था। इसलिए चंद्रा को यहां से हटाया ही नहीं गया।
क्या कर्मचारी हटाने से बंद हो जाएगा भ्रस्टाचार ?
सबसे बड़ी सवाल यह उठता है की क्या सिर्फ एक ही कर्मचारी को हटा देने से अवैध वसूली बंद हो जाएगा जिसका सवाल है नही। क्यूंकि मुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन वाली कहावत हर व्यक्ति चरिथार्थ करना चाहता है। और जिस विभाग को खाने, मलाई खाने की आदत हो वो अपने तनख्वाह मे कैसे खरीद के पेड़ा खा सकता है और ये भी संभव है की ऊंचे दर्जे की मिठाई खाने वाले विभाग के साहबों को पेड़ा रास ना आए या पाचन संबंधी समस्या भी हो सकती है।
बड़ा सवाल – कैसे निकली बिना रॉयल्टी की गाड़ी?
4 दिन पहले खनिज अधिकारी योगेंद्र सिंह, सहायक खनिज अधिकारी प्रवीण चंद्राकर, खनिज निरीक्षक बबलू पांडे और आशीष गढ़पाले की टीम ने घरघोड़ा व तमनार क्षेत्र में निरीक्षण किया। उन्होंने गाडियों की जांच प्रारंभ की। गाडियों में टीपी ही नहीं मिली है। सभी वाहनों को थाना तमनार और पूंजीपथरा के सुपुर्द किया गया है। गाड़ी क्रमांक सीजी 13 एटी 2477, सीजी 13 एटी 3276, सीजी 13 एआर 6166, सीजी 13 एक्यू 6214, सीजी 13 एएफ 2984 में लाईमस्टोन और रेत का अवैध परिवहन करते पांच ट्रैक्टर सोल्ड और एक हाइवा सीजी 13 एआर 1214 को जब्त किया गया है।
खनिज विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थी कि बिना टीपी के गाड़ियों का परिवहन किया जा रहा है। दो महीनों से रॉयल्टी भी जारी नहीं की गई थी। अब खनिज विभाग ने परीक्षण कर रॉयल्टी जारी करना प्रारंभ कर दिया है। रायगढ़ की तरफ आने पर सभी गाड़ियों को टिमरलगा खनिज बैरियर में कागजात चेक करवाने होते हैं। सवाल यह है कि जिन पांच वाहनों को चूना पत्थर परिवहन करते हुए पकड़ा गया है, ये टिमरलगा बैरियर से कैसे बचकर निकल गए। टिमरलगा बैरियर में प्रति दिन सैकड़ों गाड़ियां ऐसे ही सेटिंग में पार हो रही हैं।
नये खनीज अधिकारियों को नहीं है इल्म?
अभी अभी जिले मे ज्वाइनिंग किए अधिकारियों को इस अवैध उगाही का इल्म है या नहीं हम इसकी पुस्टि नहीं करते लेकिन जानकार बताते हैँ की अब तक जो भी पूर्व अधिकारी पदस्त सब उनमे अधिकतर के संज्ञान मे था और उन्होंने स्थानीय बिचौलियों के माध्यम से मोटी कमाई ली अपनी तिजोरी भरी हैँ। इसलिए नए खनीज अधिकारियों को अगर अधीनस्थ कर्मचारी धोखे मे रखें तोहफा तो सावधान होकर इस पर संज्ञान लें ताकि खनीज सम्पदा का ऐसा ह्रास ना हो।
सारंगढ़ कलेक्टर और एसपी लें संज्ञान –
सारंगढ़ के खनीज सम्पदाओं का दोहन बड़े पैमाने पर हुआ है शायद उसकी भरपाई ना हो पाये, लेकिन वर्तमान को मजबूत कर हम भविष्य को सुदृढ़ कर सकते हैँ और राज्य सरकार के खजाने को भर सकते हैँ। इसके लिए अभी हो रहे भ्रस्टाचार पर अंकुश लगाना सारंगढ़ कलेक्टर डॉ फरिहा आलम और ईमानदार एसपी राजेश कुकरेजा के लिए बड़ी चुनौती होगी। उन्हे गलत खबर देने की कोशिश खनन माफियाओं और भ्रस्ट अधिकारियों की हो सकती हैँ! लेकिन उन्हे चौकन्ना रह कर प्रशासन को हो रहे नुकसान पर लगाम लगाना होगा।
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