मरीजों के स्वास्थ्य सुधारने वाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुसौर कर रहा मरीजों के जान से खिलवाड़..! बायो-मेडिकल वेस्टेज खपाने में अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही आई सामने….

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रायगढ़। जिले के पुसौर ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अनिमितता से सम्भावित खतरे को इंकार नही किया जा सकता। खतरनाक कचरा अपनी इमारत के पीछे ही खुली जमीन पर फेंक रहा है। इससे अस्पताल के पीछे बायो-मेडिकल वेस्टेज का अम्बार लग गया है। जहां सिरिंज, छोटी-छोटी कांच की शीशीआ, ब्लेड कांच की बोतले, पीपी किट, नीडील, आईवी सेट, भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुसौर के पीछे मेडिकल वेस्टेज को यत्र तत्र फेंका गया है इस मेडिकल वेस्टेज कचरे से लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुसौर के पीछे फेंके गए कचरे को पशु पक्षी की खा रहे हैं ये खतरनाक स्थिति है

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पीछे खुली जमीन पर मेडिकल वेस्ट इस कचरे से लोगो के जान पर बन आई है यहां कई तरह के मरीजों के इस्तेमाल के उपयोग में लाए गए इंजेक्शन, नीडील, आईवी सेट, कांच के बोतल , अस्पताल प्रबंधन द्वारा जहां कहां फेंका गया है अस्पताल प्रबंधन लोगों की जान बचाने के बजाय लोगों के जान को खतरे में डाल रहे हैं.

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समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुसौर के अधिकारियों की घोर लापरवाही देखने को मिल रही है अधिकारी अपने कर्तव्यों का सहीं ढंग से निर्वहन नहीं कर रहे है लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं.

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अस्पताल प्रबंधन की खुद की व्यवस्था ही धराशायी-

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अस्पताल प्रबंधन ने अपने स्तर पर जो व्यवस्थाएं बनाईं, वह पूरी तरह ध्वस्त है। प्रबंधन वेस्टेज के लिए बने नियमों को ही दरकिनार कर रहा है। बायोमेडिकल वेस्ट नियम 1998 के अनुसार, अस्पताल के हर वार्ड और पूरे परिसर में चार तरह के डिब्बों को रखना है। लाल डिब्बे में सूखा कचरा डालना तय है। इसमें रुई, गंदी पट्टी, प्लास्टर जैसे सामान फेंकने के नियम हैं। पीले डिब्बे में गीला कचरा मसलन बायोप्सी, मानव अंगों का कचरा फेंकना तय है। काले डिब्बे में सूइयां, ब्लेड, कांच की बोतलें और इंजेक्शन रखे जाने हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन इन नियमों को दरकिनार कर रहा है.

पैरों में चुभ सकती है सूई-

खुले में बायोमेडिकल वेस्टेज फेंकने की हरकत बेहद खतरनाक है। फेंकी जा रहीं सूइयां लोगों के पैरों में चुभ जाने या दूसरे उपकरणों में इस्तेमाल होने पर संक्रामक बीमारियों को न्योता दे सकती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो इन्हें सामान्य तापमान पर जलाया नहीं जा सकता। इसे जलाने के लिए 1150 डिग्री सेल्सियस की जरूरत होती है। ऐसा न होने पर यह लगातार डायोक्सिन और फ्यूरान्स जैसे आर्गेनिक प्रदूषक पैदा करते हैं। इनसे कैंसर, प्रजनन और विकास संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ये रोग प्रतिरोधक सिस्टम और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित करते हैं। कई बार यह डायबिटिज का भी कारण बन जाता है। पानी, मिट्टी और हवा तीनों ही इससे दूषित होते हैं। केंद्र सरकार व मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार, यह मौत का सामान है।

जैव-चिकित्सा अपव्यय के संबंध में एनजीटी से दिशा-निर्देश-

चिकित्सा अपशिष्ट स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, जैसे कि अस्पतालों, चिकित्सकों के कार्यालयों, दंत चिकित्सा पद्धतियों, रक्त बैंकों और पशु चिकित्सा अस्पतालों / क्लीनिकों के साथ-साथ चिकित्सा अनुसंधान सुविधाओं और प्रयोगशालाओं में उत्पन्न कचरे का एक सबसेट है। आमतौर पर, मेडिकल कचरा स्वास्थ्य देखभाल अपशिष्ट है जो रक्त, शरीर के तरल पदार्थ या अन्य संभावित संक्रामक पदार्थों द्वारा दूषित हो सकता है और अक्सर इसे विनियमित चिकित्सा अपशिष्ट के रूप में संदर्भित किया जाता है।
वहीं, बायोमेडिकल कचरे में मानव और पशु शारीरिक अपशिष्ट शामिल होते हैं, जिसमें उपचार उपकरण जैसे सुई, सीरिंज, और उपचार और अनुसंधान की प्रक्रिया में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में उपयोग की जाने वाली अन्य सामग्री होती है।
यह अपशिष्ट अस्पतालों, नर्सिंग होम, पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाओं, ब्लड बैंकों आदि में निदान, उपचार या टीकाकरण के दौरान उत्पन्न होता है।
चिकित्सा अपशिष्ट / जैव-चिकित्सा अपशिष्ट का प्रबंधन

बायोमेडिकल कचरे को पर्यावरण, आम जनता और श्रमिकों, विशेष रूप से स्वास्थ्य और स्वच्छता कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए उचित रूप से प्रबंधित और निपटाया जाना चाहिए, जो एक व्यावसायिक खतरे के रूप में बायोमेडिकल कचरे के संपर्क में आने का खतरा है।
बायोमेडिकल कचरे के प्रबंधन के चरणों में पीढ़ी, संचय, हैंडलिंग, भंडारण, उपचार, परिवहन और निपटान शामिल हैं।
राष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबंधन नीति
एक राष्ट्रीय अपशिष्ट प्रबंधन नीति के विकास और कार्यान्वयन से किसी देश में स्वास्थ्य सुविधाओं में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार हो सकता है।
इस कचरे का निपटान एक पर्यावरणीय चिंता है, क्योंकि कई चिकित्सा अपशिष्टों को संक्रामक या जैव-खतरनाक के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और संभवतः संक्रामक रोग के प्रसार को जन्म दे सकता है।
मनुष्यों के लिए सबसे आम खतरा एक संक्रमण है जो इस क्षेत्र के अन्य जीवों को भी प्रभावित करता है। कचरे (लैंडफिल) के लिए दैनिक संपर्क से व्यक्ति के शरीर में हानिकारक पदार्थों या रोगाणुओं का संचय होता है।

पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल तरीकों से उत्पन्न बायोमेडिकल कचरे से आम जनता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
हालांकि, उन्होंने पाया कि इन तरीकों से बायोमेडिकल कचरा डॉक्टरों, नर्सों और चौकीदारों के लिए चिकित्सा अपशिष्ट के साथ व्यावसायिक संपर्क के माध्यम से नुकसान और जोखिम पैदा कर सकता है।
इसके अलावा, आम जनता के लिए चिकित्सा अपशिष्ट के संपर्क में आने के अवसर भी हैं, जैसे कि स्वास्थ्य सेवाओं की रूपरेखा के बाहर सुइयों का उपयोग किया जाता है, या घरेलू स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से उत्पन्न जैव चिकित्सा अपशिष्ट।

चिकित्सा अपशिष्ट के प्रभाव-

पृथ्वी पर प्रभाव
हेल्थ केयर मैनेजमेंट के अनुचित प्रबंधन में स्वास्थ्य कर्मियों, सामुदायिक सदस्यों और पर्यावरण के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों स्वास्थ्य परिणाम हो सकते हैं।

विषाक्त उत्सर्जन-

चिकित्सा अपशिष्ट के जलने से विषाक्त उत्सर्जन के रूप में अप्रत्यक्ष परिणाम के खतरों के बढ़ा सकता है।

जल प्रदूषण-

बायोमेडिकल कचरे का जो सबसे गंभीर प्रभाव है, वह है जहर का पानी में स्राव होना, जो प्राकृतिक जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है।
बायोमेडिकल अपशिष्ट चिकित्सा उपकरणों तक सीमित नहीं है; इसमें दवा, लाल बॉयोझार्ड बैग में संग्रहीत अपशिष्ट और रोगी की देखभाल के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री, जैसे कपास और बैंड-एड्स शामिल हैं।

ऐसे विषाक्त पदार्थों के लिए मानव संपर्क मानव विकास के विकास को जन्म दे सकता है और जन्म दोष पैदा कर सकता है।

पर्यावरण पर प्रभाव-

चिकित्सा क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग की उच्च मात्रा भी पर्यावरण के लिए खतरनाक खतरा बनती है।

चिकित्सा अपशिष्ट जमा होने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा सिंगल यूज प्लास्टिक की सबसे बड़ी भूमिका है, जो पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे हैं।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016

उद्देश्य: इन नियमों का उद्देश्य देश भर में हेल्थकेयर सुविधाओं (एचसीएफ) से प्रतिदिन जैव चिकित्सा अपशिष्ट का उचित प्रबंधन करना है।

सीमा: टीकाकरण शिविर, रक्तदान शिविर, सर्जिकल शिविर या किसी अन्य स्वास्थ्य सेवा गतिविधि को शामिल करने के लिए नियमों के दायरे का विस्तार किया गया है।

चरणबद्ध तरीकों से हटाना: मार्च 2016 में नियम लागू होने के बाद क्लोरीनयुक्त प्लास्टिक बैग, दस्ताने और ब्लड बैग को दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध किए गए हैं।
प्री-ट्रीटमेंट: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा या राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा निर्धारित तरीके से कीटाणुशोधन के माध्यम से प्रयोगशाला अपशिष्ट, सूक्ष्मजीवविज्ञानी अपशिष्ट, ब्लड के नमूने और ब्लड बैग प्री-ट्रीटमेंट शामिल है।
वर्गीकरण: खतरनाक मेडिकल अपशिष्ट पदार्थों को अलग करने के लिए अब 4 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो कि पहले 10 अलग-अलग श्रेणियों में होता है।

प्रदूषकों के लिए कठोर मानक-:

यह नियम पर्यावरण में प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने के लिेए अधिक कड़े मानकों को निर्धारित किया हैं।

महामारी ने उत्पादित कचरे के वैज्ञानिक रूप से निपटान के साथ-साथ संग्रह और निपटान के

इन कचरों के पृथक्करण की प्रक्रिया नहीं होने से दूषित प्लास्टिक को बढ़ावा मिलता है, जो आगे जाकर जहरीली गैसों का उत्सर्जन करते है और हवा को प्रदूषित करते है।
तेजी से से बढ़ते मेडिकल वेस्टेज की एक वजह बेलगाम आवासीय बायोमेडिकल वेस्टेज भी है, बगैर सेफ्टी प्रोटोकोल्स के काम कर रहे हैं।
इस तरह के कचरे के उचित वैज्ञानिक प्रबंधन के बिना, इसमें मरीजों के साथ-साथ कर्मचारियों और पेशेवरों को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।
स्वच्छताकर्मियों को बिना मास्क, ग्लव्ज़ और सेफ्टी के काम करना पड़ रहा है।
‘उपचार’ के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प

*रासायनिक प्रक्रियाएं*-

इन प्रक्रियाओं में रसायन कीटाणुनाशक का काम करते हैं। सोडियम हाइपोक्लोराइट, भंग क्लोरीन डाइऑक्साइड, पेरासिटिक एसिड, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, शुष्क अकार्बनिक रसायन और ओजोन ऐसे रसायनों के उदाहरण हैं।

*थर्मल प्रक्रियाएं*- इस प्रक्रिया में हीट का इस्तेमाल कर उन्हें कीटाणुरहित किया जाता है, हालांकि, यह पूरी तरह से तापमान पर निर्भर करता है।
*मैकेनिकल प्रक्रियाएं*- इन प्रक्रियाओं का उपयोग अपशिष्ट के भौतिक रूप या विशेषताओं को बदलने के लिए किया जाता है ताकि अपशिष्ट से निपटने में सुविधा हो या अन्य उपचार चरणों के साथ कचरे को संसाधित किया जा सके।
*विकिरण प्रक्रिया*- इन प्रक्रियाओं में अपशिष्टों को एक संलग्न कक्ष में पराबैंगनी या आयनकारी विकिरण के संपर्क में लाया जाता है।
*जैविक प्रक्रियाएं*- जैविक कचरे के उपचार के लिए जैविक एंजाइमों का उपयोग किया जाता है।

*खतरनाक कचरे से संबंधित*

इसके अंतर्गत खतरनाक अपशिष्ट और कि इस तरह के अपशिष्ट का प्रबंधन और
सुरक्षित तरीके से निपटारा किया जाना चाहिये।

*अस्पतालों के भीतर निगरानी समूह बनाने की जरूरत*-

अनुचित तरीकों से मेडिकल वेस्टेज निपटान के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
कड़ी कार्रवाई में दोषियों को जुर्माना देने के लिए बाध्य और अवैतनिक निलंबन जैसे प्रावधान की जरूरत है।

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