रायगढ़. जिले के नगरीय निकाय क्षेत्रों के सरकारी राशन दुकानों में विगत तीन से 4 माह से चावल की स्तर बेहद खराब हो गई है। आलम यह है कि नगरीय निकाय क्षेत्र हो या जनपद, सभी क्षेत्रों के करीब 4 लाख राशन कार्ड धारी को 836 से अधिक पीडीएस दुकान से मजबूरी में पाखड़ व कंकड़ यूक्त चावल हितग्राहियों को दिया जा रहा है। जिसे मजबूरी वश खरीद कर स्वयं के सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। साथ ही हितग्राहियों का कहना है कि चावल मोटा है और पकाने पर सही तरीके से नहीं पक रहा है, जिससे दिक्कत हो रही है।

गौरतलब हो कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्यन्न गारंटी सुरक्षा योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र बीपीएल हितग्राहियों को प्रतिमाह चावल, शकर व मिट्टी तेल प्रदान किया जाता है। इसमें जिले के शहरी क्षेत्र में कुल 69251 नीला, एपीएल व अन्य विभिन्न हितग्राही है। इसी तरह ग्रामीण इलाके की बात करे तो 348725 कार्ड धारी है। इसमें सबसे अधिक 258428 राशन कार्ड केवल प्राथमिकता यानी गरीबी रेखा के अंदर आने वाले उपभोक्ताओं को चावल विभिन्न राशन सामग्रियों के आबंटन के लिए जिले में 836 राशन दुकानें संचालित है, लेकिन वर्तमान में यहां उपभोक्ताओं को वितरित किए जाने वाले चावल की क्वालिटी को लेकर शिकायत मिल रही है। इसके बावजूद खाद्य विभाग को गरीब गुरबो से कोई सरोकार नहीं है।
नान से होती है पीठीएस दुकानों में सप्लाई –
जिले की सभी पीडीएस टुकानों में नान से चावल की सप्लाई होती है। वही नागरिक आपूर्ति निगम में चावल राइसमिलर पूर्ति करते हैं। राइस मिलर से चावल को जांच करके ही नान द्वारा लिया जाता है, लेकिन यहां चावल में हेराफेरी करना कोई बड़ी बात नहीं है। बताया जाता है कि राइस मिलर्स और अधिकारियों के बीच सांठगांठ के चलते घटिया चावल को भी पास कर दिया जाता है। जिसका खामियाजा पात्र हितव़ाहियों को भुगतना पड़ता है।
पेट दर्द की आ रही शिकायत-
इस संबंध में उपभोक्ताओं का कहना है कि चावल पकाने पर पूरी तरह से नहीं पक रब्य है। जिससे पेट दर्द की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में हितग्राहियों का कहना है कि अगर विभागीय अधिकारी पीडीएस टुकानों से वितरण ह्ेने वाले चावल की जांच की जाए तो इसकी वास्तविकता खुद ब खुद सामने आ जाएगी, लेकिन जांच नही लेने के कारण दुकान संघचालक मनमाने ढंग से घटिया स्तर के चावल वितरण कर रहे हैं।
दुकान संचालकों की चलती है मनमानी –
इस संबंध में उपभोक्ता रुकमणि, घसनीन सहित अन्य हितग्राहियों ने बताया कि जब पीडीएस संचालक चावल की बोरी खोलते हैं और उसमें खराब चावल निकलने पर जब लेने से मना किया जाता है तो उनका कहना झ्षेता है कि सामने में बोरा खोला है उसमें खराब है तो मैं क्या कर सकता हूं, अगर लेना है तो लो वरना देख लो। ऐसे में मजबूरीवश चावल को लेना पड़ता है, जिसके चलते उक्त चावल के खाने से कई तरह की समस्याएं आ रही है।
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