स्पोर्ट्स हॉस्टल में सीनियरों के द्वारा रैगिंग: आलोपिक विनर दुत्ती चंद ने सुनाई अपनी आपबीती,मालिश और कपड़े धोने के लिए करते थे मजबूर….
हाल ही में ओलंपियन विनर ने कुछ चौकाने वाले खुलासे किए हैं। दुत्ती ने बताया कि 2006 से 2008 के दौरान उन्हें स्पोर्ट्स हॉस्टल में सीनियरों के द्वारा रैगिंग का सामना करना पड़ा था। ओडिशा में पैदा हुई दुत्ती ने यह बात शनिवार को बीजेबी ऑटोनॉमस कॉलेज की छात्रा द्वारा रैगिंग के कारण आत्महत्या करने के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए जवाब में यह बात कही थी।
मालिश और कपड़े धोने के लिए करती थी मजबूर
दुत्ती चंद ने बताया कि- ‘2022-23 बोर्ड की परिक्षा की तैयारी करने के लिए कक्षा क्वेश्चन बैंक की सीबीएसई, आईसीएई पुस्तकें चाहिए थी। जब मैंने सीनियर्स ने मांगी तो उन्होंने कहा- दीदी मुझे स्पोर्ट्स हॉस्टर में अपने शरीर की मालिश करने और अपने कपड़े धोने के लिए मजबूत करती थी।’
छात्रावास का भी उड़ाया जाता था मजाक
आगे वह बताती हैं कि- ‘होस्टल की सीनियर्स उनकी वित्तीय स्थिति का मजाक भी उड़ाते थे। अधिकारियों ने जब मैंने इस बात की शिकायत की तो उन्होंने भी इस बात पर कभी भी ध्यान नहीं दिया।’ ओलंपियन ने कहा- ‘जब मैं छात्रावास प्रभारी से कोई शिकायत करती थी तो वह मुझे डांटते थे। मेरे लिए यह मानसिक रुप से बहुत ही मुश्किल स्थिति थी, लेकिन मैं उस समय बहुत ही असहाय थी।’
कॉलेज प्रशासन ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
दुत्ती चंद ने बताया कि – ‘भुवनेश्वर में स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल के अधिकारियों ने भी अभी तक इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।’
कौन है दुत्ती चंद?
दुत्ती चंद 2013 से ही भारतीय एथलेटिक्स के लिए एख इंजन की तरह रही हैं। वह भारत की पहली स्प्रिंटर हैं जो समलैंगिक एथलीट हैं। उन्होंने 2019 में इटली के नेपल्स में हुए वर्ल्ड यूनिवर्सियाड में इतिहास रचा था और इस ग्लोबल मीट में हुई 100 मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी थी। वह शुरु से ही पेशेवर और व्यक्तिगत दोनों रुप में ही भारत की सबसे होनहार एथलीटों में से एक रुप में उभरकर सामने आई हैं। महिलाओं के 100 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम पर दर्ज है। वह 2016 के रियो ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई करके ओलंपिक खेलों में महिलाओं के 100 मीटर में भाग लेने वाली देश की पांचवी भारतीय एथलीट बनी थी।
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