नई दिल्ली: डीए में बढ़ोतरी होने का इंतजार कर रहे सरकारी कर्मचारियों को मोदी सरकार बड़ा झटका दे सकती है। दरअसल सरकार अब सरकारी कर्मचारियों को सैलरी भुगतान करने के तरीके में बदलाव कर सकती है। बताया जा रहा है कि सरकार सातवें वेतन आयोग के बाद नया कोई वेतन आयोग नहीं बनाएगी। बता दें कि सरकार कुछ-कुछ समय पर नया वेतन आयोग लाती है और सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाती है।

आने वाले दिनों में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाए जाने के लिए वेतन आयोग के बजाय एक दूसरा ही फॉर्मूला लाए जाने की तैयारी हो रही है। सूत्रों की मानें तो वित्त मंत्रालय कर्मचारियों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी सैलरी में बढ़ोतरी करने का फॉर्मूला लागू करने पर विचार कर रहा है। सरकार अभी इस पर विचार कर रही है कि अगर इसे लागू किया जाता है तो यह फॉर्मूला कैसे काम करेगा।
वेतन आयोग के जरिए सैलरी बढ़ाए जाने के बजाय एक नया फॉर्मूला लागू करने की बात करीब 6 साल पहले चर्चा में आई थी। तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में कहा था कि अब सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाए जाने के लिए वेतन आयोग लाने के बजाय कुछ हटकर सोचने की जरूरत है। माना जा रहा है कि अब मोदी सरकार अरुण जेटली के उसी सपने को साकार करने की तैयारी कर रही है।
नए फॉर्मूले में कर्मचारियों के डीए को आधार बनाया जा सकता है। कर्मचारियों का डीए 50 फीसदी बढ़ते ही उनकी सैलरी में ऑटोमेटिक इजाफा होने का फॉर्मूला अपनाया जा सकता है। अभी तक इस फॉर्मूले पर कोई फाइनल डिसीजन नहीं हुआ है, लेकिन नए फॉर्मूले से सबसे अधिक फायदा छोटे स्तर के कर्मचारियों को होगा। सरकार के नए फॉर्मूले से केंद्र के 68 लाख कर्मचारियों और करीब 52 लाख पेंशनधारकों को फायदा मिलेगा।
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