महाराष्ट्र का शातिर तस्कर छतीसगढ़ बॉर्डर मे वर्षो करता था गांजे की तस्कारी, किसी को शक तो दूर भनक लगना भी मुश्किल, लेकिन “कमल-अर्जुन” के रचे चक्रव्यूह मे फंस गया शेख इरसाद……
जगन्नाथ बैरागी
रायगढ़। तस्करों के शातिराना अंदाज का अंदाजा लगाना उतना ही मुश्किल है जितना अंधेरे मे तीर चलाना लेकिन कुछ पुलिसकर्मी इस काम मे बखूबी माहिर होते हैँ ख़ासकर ऐसे थाने जिनका क्षेत्र बॉर्डर एरिया मे होता है उन्हे ऐसे ही अंधेरे मे तीर चलाने सिद्धस्थ होना ही पड़ता है, और ऐसे ही तेजतर्रार पुलिसकर्मी है थाना प्रभारी है केके पटेल और प्रधान आरक्षक अर्जुन पटेल।

मोटर व्हिकल एक्ट की कार्यवाही के दौरान पकड़ाया शातिर गांजा तस्कर –
थाने से प्राप्त जानकारी के अनुसार 14 अप्रैल शाम छतीसगढ़ के सरिया क्षेत्र मे ओड़िसा बॉर्डर मे स्थित कंचनपुर बेरियर मे सरिया पुलिस मोटर वाहनों की कागजात जांच कर एम. व्ही. एक्ट के तहत कार्यवाही मे व्यस्थ थी। तभी एक व्यक्ति काले रंग के बैग पकड़ कर पैदल ही बेरियर पार कर रहा था। ऊपरी तौर कब वह कोई सज्जननुमा राहगीर ही नजर आ रहा था, लेकिन प्रधान आरक्षक अर्जुन पटेल को उसकी भावभंगीमा मे कुछ गड़बड़ी दिखी और तत्काल थानाप्रभारी के.के. पटेल से मन की संदेह को साझा किया। सरिया थाना प्रभारी के के पटेल ने जब अपने स्टॉफ और अन्य उपस्थित नागरिकों के समक्ष बैग खोलने की बात कही तो शेख इरसाद अनाकानी कर कानून की दुहाई देकर बैग खोलने से मना करने लगा। लेकिन पुलिस के कहने पर मजबूरिवश बैग खोला तो सबकी आँखे फ़टी रह गयी, क्योकि बैग मे कपड़े के अंदर तकरीबन 4 किलो गांजा मूल्य लगभग 20000 रुपये पाया गया। गांजा छुपाकर पैदल ही चलकर बेरियर पार करने की अनोखा चाल चल कर पुलिस के आँखों मे धूल झोकने भी उसकी यह कोशिश नाकाम हो गयी थी।

बॉर्डर-बेरियर पर वर्षो आजमाया पैतरा हुवा फैल-
नागपुर महाराष्ट्र निवासी शेख इरसाद पिता शेख मोहम्मद ने बताया की वाह वर्षो से यह पैतरा बॉर्डर और बेरियर चेकिंग के दौरान अपनाते आ रहा है लेकिन कभी पकड़ा नही गया। लेकिन सरिया पुलिस ने ना जाने कैसे उसपर आशंका जाहिर की समझ से परे है। फिलहाल सरिया पुलिस ने शेख इरसाद उम्र 60 वर्ष 4 किलो गांजा मूल्य लगभग 20000 रुपये
पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाही कर न्यायलय को सूचित कर दी है। उपरोक्त कार्रवाई मे थाना प्रभारी केके पटेल, प्रधान आरक्षक अर्जुन पटेल के साथ अर्जुन मोहन पटेल, टीकाराम पटेल, महादेवा बंजारा, महिला आरक्षक लता का मुख्य योगदान रहा।
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