6 वीं के बच्चे आर्यन ने पढ़ाया मानवता का पाठ.. शिक्षकों ने मात-पिता के संस्कारो को दिया श्रेय… क्या आप भी अपने बच्चो को देते हैँ ऐसा संस्कार… पढ़िए ज्ञानदीप स्कूल जांजगीर के आर्यन की सच्ची कहानी….
जांजगीर-चांपा/पांच रूपए दस रूपए की टाफी से खुश हो जाने वाले बच्चों के लिए एक सौ साठ रूपए बहुत होते हैं, ज्ञानदीप स्कूल जांजगीर में पढ़ने वाले कक्षा छठवीं के छात्र आर्यन सिंह को स्कूल से दिए जा रहे पुस्तक में एक सौ साठ रूपए मिल गए जिसे देखते ही उसे लगा कि इस पैसे की जरूरत उस छात्र को ज्यादा होगी जिसने उसे पुस्तक में रखा है और उसने अपनी मैडम के माध्यम से उस पैसे को संबंधित छात्र को वापस लौटा दिए।

ज्ञानदीप उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जांजगीर में इस वर्ष आर्यन सिंह क्षत्री ने इंग्लिश मिडियम में कक्षा पांचवी की परीक्षा दिलायी है वहीं सोमवार से प्रारंभ हुए नए सत्र में वह कक्षा छठवीं में बैठ रहा है, बुधवार को विद्यालय में बच्चों से उनकी पुरानी पुस्तक मंगाई गयी थी जिसे कि दूसरे कक्षा के बच्चों को उसे देकर उनसे प्राप्त पुस्तक से स्कूल आने वाले बच्चों को नए सत्र में अध्ययन प्रारंभ करायी जा सके। इसी कड़ी में आर्यन अपनी पांचवी की पुस्तक लेकर स्कूल गया था। उसने अपनी पांचवी की पुस्तक स्कूल में जमा की तो उसे मैडम श्रीमती हेमलता शर्मा की ओर से कक्षा छठवी की पुस्तक दी गयी। पुस्तक लेकर आर्यन अपने स्थान पर वापस आ गया, यहां उसने पुस्तक को पलटना प्रारंभ किया तो उसे उस पुस्तक के भीतर एक दस रूपए, एक पचास रूपए और एक सौ रूपए कुल 160 रूपए दबे हुए मिले। पुस्तक में रूपए होने की जानकारी उसने तुरंत अपनी मैडम श्रीमती हेमलता शर्मा को दिया जिसके बाद मैडम ने उस पुस्तक में लिखे नाम के आधार पर उक्त रूपए को संबंधित छात्र को वापस कर दिया। आर्यन सिंह ने जब पूछा गया कि पुस्तक के भीतर रूपए देखकर उसे अपने पास रखने का ख्याल नहीं आया तो आर्यन ने कहा कि वो रूपए मेरे थे ही नहीं, फिर जिसने उसे पुस्तक में रखा था उसे उसकी ज्यादा जरूरत रही होगी इसलिए मैं उसे अपने मैडम को दे दिया, बाद में मैडम ने उस पुस्तक में लिखे नाम को देखकर संबंधित छात्र को वापस लौटा दिया। आर्यन सिंह क्षत्री दैनिक समाचार पत्र छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के संपादक राजेश सिंह क्षत्री का पुत्र है।

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