रायगढ़: रायगढ़ तहसील कार्यालय में कानून और विधिक प्रक्रिया के तहत न्याय की गुहार लगाने पहुंचे पीड़ित पक्ष ने सीमांकन की प्रक्रिया और कथित मनमानी पर सवाल उठाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि जब मामला विधिक रूप से न्यायालय के विचाराधीन है, तब अंतिम फैसले से पूर्व मौके पर निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया गया। तहसील पहुंचे फत्तेचंद पटेल और उनके सहयोगी कैलाश आचार्य ने मीडिया और प्रशासनिक तंत्र के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि उनकी पैतृक भूमि के साथ-साथ नेशनल हाईवे से सटी शासकीय भूमि को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अदालत में प्रकरण लंबित, फिर भी निर्माण का प्रयास-
पीड़ित फत्तेचंद पटेल द्वारा तहसीलदार एवं जूटमिल थाना प्रभारी को दिए गए लिखित शिकायती आवेदन के अनुसार, विपक्षी पक्षकार द्वारा जमीन पर कब्जे को लेकर तहसीलदार न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था, जिसके आधार पर उन्हें नोटिस जारी हुआ। पीड़ित का कहना है कि जब मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, तो फैसले से पूर्व किसी भी पक्ष को स्थल की स्थिति में फेरबदल करने का अधिकार नहीं बनता। आरोप है कि इसके बावजूद मौके पर अचानक बाउंड्रीवॉल का निर्माण कार्य शुरू कराया गया। पीड़ित का दावा है कि संबंधित भूमि उनकी वैध पैतृक संपत्ति है, जिस पर विधिक प्रक्रिया पूरी हुए बिना किसी भी प्रकार का निर्माण अनुचित है।
सीमांकन पर उठे सवाल-
मामले में सीमांकन प्रक्रिया की तकनीकी त्रुटियों को रेखांकित करते हुए कैलाश आचार्य ने बताया कि यह विवाद छातामुड़ा और बांजीपाली राजस्व हल्कों की सीमा से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, राजस्व नियमों के विपरीत खसरा नंबर 155/2 को दो अलग-अलग हल्कों में दर्शाने जैसी विसंगति सामने आई है।
इसके अलावा, पूर्व में किए गए सीमांकन पर आपत्ति दर्ज कराते हुए पीड़ित पक्ष ने कहा कि जिस समय स्थल निरीक्षण किया गया था, उस वक्त भारी वर्षा, जलभराव और झाड़ियों के कारण सटीक नपाई संभव नहीं थी। इसी आधार पर पंचनामे के दौरान ही असहमति और लिखित आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
शासकीय मद की भूमि को लेकर भी जताई आशंका
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विवादित स्थल नेशनल हाईवे से सटा हुआ है, जहां खसरा नंबर 156 की भूमि शासकीय मद में दर्ज है। पीड़ितों ने आशंका जताई है कि सीमा विवाद की आड़ में निजी भूमि के साथ-साथ हाईवे से सटी बेशकीमती सरकारी भूमि को भी प्रभावित किया जा सकता है।
संयुक्त दल से जांच की मांग-


शिकायत के अनुसार, मौके पर निर्माण की सूचना तहसीलदार को लिखित व मौखिक रूप से दिए जाने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य को स्थगित करा दिया है। हालांकि, पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह केवल तात्कालिक समाधान है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि जब तक न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक मौके पर लिखित स्थगन आदेश प्रभावी रखा जाए।
साथ ही, पीड़ितों ने छातामुड़ा और बांजीपाली दोनों हल्कों के सक्षम राजस्व अधिकारियों, राजस्व निरीक्षकों और हल्का पटवारियों की एक संयुक्त टीम गठित कर मौसम साफ रहने पर निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से नए सिरे से सीमांकन कराने की मांग की है।




- न्यायालय में विचाराधीन भूमि पर निर्माण का प्रयास…तहसीलदार के निर्देश पर रुका काम, संयुक्त सीमांकन की मांग…सीमा विवाद में उलझी हाईवे से सटी बेशकीमती जमीन, किसान ने लगाया गंभीर आरोप… - October 26, 2026
- दिसंबर से पहले पक्के मकान का लक्ष्य, एक्शन मोड में सीईओ नायक; 10 पंचायतों में विशेष अभियान… - October 26, 2026
- रामलला-काशी विश्वनाथ के दर्शन कर धन्य हुए 30 श्रद्धालु… - October 26, 2026
