सारंगढ़। सरकारी स्कूलों में शिक्षा को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में शासकीय प्राथमिक शाला दहिदा में प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। विद्यालय की प्रधान पाठक प्रियंका गोस्वामी की प्रेरणा से स्कूल के पूर्व छात्र राधेश्याम सिदार ने विद्यार्थियों के लिए लैपटॉप भेंट किया। 15 जुलाई 1947 को जन्मे राधेश्याम सिदार 79 वर्ष की आयु पूरी कर जीवन के 80वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। इस उम्र में भी अपनी मातृसंस्था के प्रति उनका लगाव और बच्चों के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता सराहनीय है।
विद्यालय के वर्ष 1954 के पूर्व छात्र राधेश्याम सिदार स्वयं स्कूल पहुंचे और प्रधान पाठक प्रियंका गोस्वामी की उपस्थिति में विद्यार्थियों को लैपटॉप सौंपा। इस दौरान विद्यालय में भावुक और उत्साहपूर्ण माहौल रहा। लंबे समय बाद अपनी पुरानी शाला पहुंचकर उन्होंने छात्र जीवन की यादें ताजा कीं और विद्यालय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
राधेश्याम सिदार ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, जीवन में आगे बढ़ने और अपने कार्यों से देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने इस प्रयास के माध्यम से यह संदेश दिया कि शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती। अपनी पुरानी संस्था से जुड़ाव बनाए रखते हुए नई पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बनाने का उनका प्रयास समाज के लिए अनुकरणीय है।
लैपटॉप मिलने से अब प्राथमिक शाला के बच्चों को कंप्यूटर का बुनियादी ज्ञान प्राप्त करने और डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा। वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह सौगात विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बच्चों में कंप्यूटर के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें आधुनिक शिक्षा पद्धति से परिचित कराने में मदद मिलेगी।
विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल को मातृसंस्था के प्रति सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता की अनूठी मिसाल बताया। साथ ही कहा कि वर्षों बाद भी अपने विद्यालय को याद रखना और वहां पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए आगे आना अन्य पूर्व विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है।
इस पूरे प्रयास में प्रधान पाठक प्रियंका गोस्वामी की भूमिका भी सराहनीय रही, जिनकी प्रेरणा से पूर्व छात्र विद्यालय की सहायता के लिए आगे आए। उनकी पहल से यह संदेश सामने आया है कि यदि शिक्षक, पूर्व विद्यार्थी और समाज मिलकर प्रयास करें, तो सरकारी स्कूलों में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
राधेश्याम सिदार की यह सौगात केवल एक लैपटॉप नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के सपनों को डिजिटल उड़ान देने की प्रेरणादायक पहल है।

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