सारंगढ़। पितृपक्ष के दौरान एकादशी के अवसर पर सारंगढ़ क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण करते हुए विधि-विधान से तर्पण और पूजा-अर्चना की। पितृपक्ष के 11वें दिन सुबह से ही तालाबों एवं नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। लोगों ने आस्था के साथ स्नान कर अपने पूर्वजों को जल अर्पित किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पंडितों के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने तिल, जल, कुश एवं अन्न अर्पित कर पिंडदान और तर्पण की रस्में पूरी कीं। कई परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि देते हुए धार्मिक अनुष्ठान भी किए। घाटों पर सुबह से ही पूजा-पाठ और धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धा एवं आस्था का माहौल बना रहा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है। एकादशी के दिन पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कर्म को भी श्रद्धालु विशेष फलदायी मानते हैं। इस अवसर पर अनेक लोगों ने व्रत रखकर भगवान की पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार और पूर्वजों की सुख-शांति की कामना की।
सुबह से घाटों पर पहुंच रहे श्रद्धालुओं के कारण क्षेत्र में धार्मिक वातावरण देखने को मिला। लोगों ने श्रद्धापूर्वक अपने पितरों को याद कर परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार तर्पण किया। दिनभर घाटों पर आस्था और श्रद्धा का सिलसिला चलता रहा।

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