सारंगढ़। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फर्सवानी, विकासखंड सारंगढ़ में पदस्थ व्याख्याता हिंदी भरत लाल पटेल को शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद ‘शिक्षा शिल्पी’ (Education Sculptor) अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया। 26 सितंबर 2026 को नवा रायपुर स्थित कलिंगा यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ शासन, राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष डॉ. सुधीर गौतम ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर कलिंगा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संदीप गांधी सहित कोर कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।
ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत शिक्षक भरत लाल पटेल ने शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन, नवाचार और सामाजिक जागरूकता विकसित करने का निरंतर प्रयास किया है। विषय शिक्षक के रूप में वे पिछले कई वर्षों से विद्यालय में नियमित रूप से छह कालखंड अध्यापन का कार्य कर रहे हैं, जो हायर सेकेंडरी स्तर के विद्यालयों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण माना जा सकता है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए वे उन्हें खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं विभिन्न नवाचारी गतिविधियों से जोड़ते हैं तथा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपने निजी खर्च से प्रोत्साहित और पुरस्कृत भी करते हैं।
भरत लाल पटेल पिछले 12 वर्षों से कक्षा 12वीं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करते आ रहे हैं। वहीं कक्षा 11वीं की परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले पांच विद्यार्थियों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई के लिए सभी विषयों की किताबें, कॉपियां, गाइड, पेन और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री स्वयं के खर्च से उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा अनुशासित एवं होनहार विद्यार्थियों को भी कॉपियां और पेन देकर प्रोत्साहित करते हैं। विद्यार्थियों में समानता और समभाव की भावना बनाए रखने के उद्देश्य से वे विद्यालय में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को वर्ष में तीन अवसरों—बाल दिवस, नववर्ष और वार्षिक परीक्षा—पर कलम वितरित कर खुशियों के अवसर को यादगार बनाते हैं।
भरत लाल पटेल मूलतः अपने सेवा क्षेत्र से करीब 70 किलोमीटर दूर के निवासी हैं, लेकिन विद्यालय के प्रति उनका लगाव ऐसा है कि पिछले 10 वर्षों से वे दीपावली के अवसर पर घर जाने के बजाय विद्यालय को ही अपना घर मानकर स्वयं के खर्च से सजाते आ रहे हैं। दीपावली पर विद्यालय परिसर को 365 दीयों से जगमग करने की उनकी परंपरा क्षेत्र में विशेष चर्चा का विषय रही है। उनका यह प्रयास विद्यालय के प्रति उनके समर्पण और विद्यार्थियों से आत्मीय जुड़ाव को दर्शाता है।
एक शिक्षक के रूप में भरत लाल पटेल का कार्य यह संदेश देता है कि शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने और वेतन प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। एक शिक्षक कुशल योजनाकार, मार्गदर्शक और साहित्यकार के रूप में भी विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा दे सकता है। शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को साथ लेकर चलने वाले भरत लाल पटेल के अनेक कार्यों ने उन्हें शिक्षा जगत में अलग पहचान दिलाई है।
भरत लाल पटेल को इससे पहले 30 अगस्त 2026 को रायपुर के शकुंतला फाउंडेशन द्वारा ‘आचार्य शिरोमणि सम्मान-2026’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। लगातार मिले इन सम्मानों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भरत लाल पटेल ने कहा कि “यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि मेरे विद्यालय के स्नेहिल बेटे-बेटियों और विद्यालय में कार्यरत मेरे अभिन्न शिक्षक मित्रों का सम्मान है।” उनकी यह भावना उनकी विनम्रता, सहृदयता और विद्यालय के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाती है। भरत लाल पटेल का शिक्षकीय सफर इस बात का उदाहरण है कि सकारात्मक सोच, समर्पण और निरंतर प्रयासों के माध्यम से कोई भी शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।

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