सारंगढ़:
सरिया तहसील अंतर्गत ग्राम कठघरा में डीबी पावर प्लांट की फ्लाई ऐश डंपिंग और परिवहन को लेकर उठे विवाद पर प्रशासनिक जांच के बाद असली तथ्य सामने आ गए हैं।

प्रकाशित खबरों के विपरीत, असल मामला ग्रामीणों की शिकायत पर जनहित की रक्षा और अवैध डंपिंग रोकने का है।
तहसीलदार ने पूरी प्रक्रिया को नियमानुसार और पारदर्शी बताते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन ने केवल जनता की शिकायत और एसडीएम के निर्देश पर विधिपूर्वक जांच की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कठघरा के ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से लिखित शिकायत की थी कि कंपनी द्वारा बिना पानी निकाले, जलस्रोतों के पास सीधे फ्लाई ऐश डंप किया जा रहा है। इससे गांव का भूजल और पेयजल स्रोत दूषित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसके अतिरिक्त पूर्व सरपंच द्वारा कार्यकाल समाप्ति के बाद नियमों के विरुद्ध जारी कथित एनओसी को लेकर भी शिकायत प्राप्त हुई थी। जनता की इस गंभीर समस्या को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के निर्देश पर तहसीलदार मौके पर प्राथमिक जांच के लिए पहुंचे थे।
तहसीलदार के अनुसार, जांच के दौरान मौके पर पांच भारी ट्रेलर और एक लोडर मौजूद पाए गए। प्रारंभिक जांच में वाहन ओवरलोडेड प्रतीत हो रहे थे। जब उपस्थित सुपरवाइजर व संबंधितों से फ्लाई ऐश परिवहन, रॉयल्टी पास और वाहनों के वैध कागजात मांगे गए, तो वे कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे। मौके पर मौजूद माइनिंग इंस्पेक्टर ने भी जब आवश्यक अनुमतियां और रॉयल्टी पर्ची मांगी, तो कंपनी प्रतिनिधियों द्वारा दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
सुपुर्दगी के बाद गाड़ियां भगाने का प्रयास-
तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने शुरुआत में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की थी, बल्कि पंचनामा बनाकर गाड़ियों को प्राथमिक तौर पर कंपनी के ही सुपरवाइजर की सुपुर्दगी में खड़ा रहने का निर्देश दिया गया था। लेकिन प्रशासन को चकमा देते हुए सुपुर्दगी में दी गई 5 में से 3 गाड़ियों को रात के अंधेरे में वहां से गायब कर दिया गया। जब प्रशासन की कस्टडी से वाहनों को गैरकानूनी तरीके से हटाया गया, तब जाकर प्रशासन ने शेष वाहनों को सुरक्षित रखने और कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने हेतु उन्हें थाने में खड़ा करवाया।
तहसीलदार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि उन पर लिखित अनुमति देने का दबाव बना रहे थे कि वे काम जारी रख सकें। चूंकि मामले में खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग और आरटीओ की संयुक्त जांच बाकी है, इसलिए बिना विभागीय जांच रिपोर्ट और नियमों के सत्यापन के काम चालू करने की लिखित अनुमति देना विधि विरुद्ध होता।
तहसीलदार का बयान-
“हमारा दायित्व जनता के अधिकारों, पर्यावरण और शासकीय नियमों की रक्षा करना है। ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम साहब के संज्ञान में लाकर जांच की गई थी। मौके पर दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे और ओवरलोड गाड़ियों को जब सुपुर्दगी में दिया गया तो उन्हें गायब करने की कोशिश की गई। जब तक खनिज और परिवहन विभाग अपनी अंतिम जांच पूरी नहीं कर लेते, तब तक नियमों का उल्लंघन करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। प्रशासन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद और जांच को प्रभावित करने की कोशिश हैं।”



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