सारंगढ़: सारंगढ़-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर गढ़चौक से प्रतापगंज तक निर्माणाधीन नाली इन दिनों भ्रष्टाचार और लापरवाही की जीती-जागती मिसाल बनी हुई है। नगरपालिका प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस निर्माण कार्य ने सरकारी धन की बर्बादी और जनता की मुसीबतें बढ़ाने के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, इस नाली निर्माण के लिए दो चरणों में क्रमशः 11 लाख और 9 लाख रुपये (कुल 20 लाख रुपये) की राशि स्वीकृत है. लेकिन मौके पर चल रहे काम को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह राशि नाली निर्माण के बजाय किसी की जेब भरने के लिए जारी की गई हो।

तकनीकी मापदंडों की ऐसी-तैसी-
निर्माण कार्य में तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है. नाली की लंबाई, चौड़ाई, गहराई और ऊंचाई, सब कुछ ‘इंजीनियर साहब’ की मर्जी के बजाय ठेकेदार की ‘सुविधा’ के अनुसार तय हो रहा है। सबसे हास्यास्पद और गंभीर बात यह है कि मुख्य सड़क से उचित दूरी पर होने के बजाय, नाली बेजा कब्जों को हटाए बिना ही सीधे लोगों के घरों और दुकानों के अंदर से निकाली जा रही है।
नाली बनाने के चक्कर में लोगों के घरों की दीवारें बेरहमी से तोड़ी गई है।
नाली इतनी उथली है कि पानी का सुचारू बहाव मुमकिन ही नहीं है।
सरिये की जो जाली बिछाई गई है, वह न केवल बहुत कमजोर है, बल्कि नाली के आकार के मुकाबले बेहद पतली है। यह निर्माण पहले ही मानसून में ढहने को तैयार लगता है!
निर्माण स्थल पर गंदगी का अंबार है और ऐसा लग रहा है कि बस किसी तरह सीमेंट-कंक्रीट डालकर पैसे वसूलने की तैयारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भविष्य में इस मार्ग पर ‘गौरवपथ’ का निर्माण प्रस्तावित है। ऐसे में, वर्तमान नाली का डिजाइन ऐसा है कि गौरवपथ बनते समय इसे अनिवार्य रूप से तोड़ना ही पड़ेगा। यह जानते हुए भी, एक ‘चहेते’ ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए एस्टीमेट के प्रावधानों को ठेंगा दिखाकर जल्दबाजी में निर्माण कराया जा रहा है।
इस पूरे मामले में नगरपालिका के सीएमओ और इंजीनियर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।शिकायत के बावजूद दोनों अधिकारियों ने एक बार भी मौके पर जाकर निरीक्षण करना जरूरी नहीं समझा। लगता है, वे एयरकंडीशंड दफ्तरों में बैठकर ‘सब चंगा सी’ का बोर्ड लगाकर खुश हैं। पिछले दस दिनों से जारी इस ‘द्रुत गति’ के निर्माण का एकमात्र उद्देश्य जल्द से जल्द कागजी खानापूर्ति कर भुगतान हड़पना है।
नाली निर्माण के इस ‘खेले’ से प्रतापगंज और गढ़चौक के निवासियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि इस नाली से जलभराव की समस्या हल होने के बजाय और बढ़ेगी। सड़क का पानी नाली में जाने के बजाय, नाली का गंदा पानी उनके घरों और मुख्य सड़क पर बहेगा।
जनता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस ‘कागजी विकास’ पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई और दोषी ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई, तो वे जिला प्रशासन और नगरपालिका के खिलाफ उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे. ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जवाबदारी पालिका प्रशासन की होगी।

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