सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ की सहकारी बैंक व्यवस्था में किसानों के नाम पर खाद-बीज और कर्ज से जुड़ी राशि में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। प्रदेश के सात जिला सहकारी बैंकों की अलग-अलग शाखाओं में हुई जांच के दौरान करीब 60 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इनमें सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला क्षेत्र में ही 18.13 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आया है। मामले में कुल 63 लोगों पर कार्रवाई की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान बैंक की विभिन्न शाखाओं में किसानों के खातों, कर्ज की राशि तथा खाद-बीज से जुड़े लेन-देन में अनियमितताएं सामने आईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्मचारियों के साथ-साथ शाखा स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।

बरमकेला में 18.13 करोड़ की गड़बड़ी
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में सामने आया मामला खास तौर पर बरमकेला क्षेत्र से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार यहां किसानों से संबंधित खाद-बीज और कर्ज की राशि में करीब 18.13 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई। जांच में बैंक शाखाओं के लेन-देन और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई, जिसके बाद कई कर्मचारियों और शाखा प्रबंधकों की भूमिका सवालों के घेरे में आई।
मामले में 50 क्लर्क, लिपिक, लेखापाल और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ 13 शाखा प्रबंधक या प्रभारी शाखा प्रबंधकों पर कार्रवाई की गई है। कुछ कर्मचारियों को पद से हटा दिया गया है, जबकि कई मामलों में जांच और पुलिस कार्रवाई जारी रहने की जानकारी दी गई है।
अम्बिकापुर में सबसे बड़ी 32.61 करोड़ की हेराफेरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि सात जिलों में सामने आई गड़बड़ी में जिला सहकारी बैंक अंबिकापुर की सात शाखाओं में सबसे बड़ा मामला सामने आया, जहां करीब 32.61 करोड़ रुपये की हेराफेरी की बात कही गई है। इसके बाद बरमकेला शाखा का 18.13 करोड़ रुपये का मामला सामने आया।
अन्य शाखाओं में भी लाखों-करोड़ों रुपये की अनियमितता सामने आने का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि मामला किसी एक शाखा या कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सहकारी बैंक की निगरानी और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कर्ज की रकम जमा नहीं की, खाद-बीज के नाम पर नकद निकाला
जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में किसानों के नाम पर स्वीकृत कर्ज की रकम बैंक में जमा नहीं की गई, जबकि खाद-बीज के नाम पर नकद राशि निकालने जैसी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों के नाम पर होने वाले ऐसे लेन-देन की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी और लंबे समय तक कथित गड़बड़ी बैंक के रिकॉर्ड में कैसे चलती रही। बरमकेला का मामला सामने आने के बाद बैंक की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
50 कर्मचारी और 13 शाखा प्रबंधक कार्रवाई की जद में
जांच के बाद कार्रवाई का दायरा केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक 50 कर्मचारियों और 13 शाखा प्रबंधकों पर कार्रवाई की गई है। कुछ कर्मचारियों को पद से हटाया गया है, वहीं कई मामलों में जांच और पुलिस कार्रवाई अभी जारी है।
इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों और शाखा प्रबंधकों पर कार्रवाई से यह मामला सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि कथित गड़बड़ी में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और किसानों की राशि की भरपाई किस तरह होगी।
जांच से उठे निगरानी व्यवस्था पर सवाल
बरमकेला में 18.13 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की आंतरिक ऑडिट, शाखा निगरानी और उच्च स्तर के नियंत्रण तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि रिकॉर्ड में लंबे समय तक इतनी बड़ी राशि का अंतर बना रहा, तो समय पर इसकी पहचान क्यों नहीं हो सकी—यह जांच का अहम बिंदु है।
अब किसानों और खाताधारकों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद दोषियों से राशि की वसूली होती है या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सहकारी बैंकों में क्या ठोस व्यवस्था लागू की जाती है।
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