बरमकेला। विकासखंड बरमकेला अंतर्गत शासकीय विद्यालयों में वर्षों से साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे लगभग 350 स्कूल सफाई कर्मचारी इन दिनों आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित बीईओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही के कारण सफाई कर्मचारियों को समय पर मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नवाखाई जैसे महत्वपूर्ण पर्व के बीच भी मानदेय नहीं मिलने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बताया जा रहा है कि बरमकेला विकासखंड के शासकीय विद्यालयों में वर्ष 2011 से स्कूल सफाई कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूल परिसर की साफ-सफाई, शौचालयों की सफाई सहित विद्यालय से जुड़े विभिन्न आवश्यक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद मानदेय भुगतान में लगातार देरी होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

समय पर भुगतान नहीं होने से बढ़ी परेशानी
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला मानदेय पहले ही काफी कम है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सफाई कर्मचारियों को लगभग ₹2,500 प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इतनी कम राशि में परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, राशन, कपड़े, दवाइयां और अन्य घरेलू जरूरतें पूरी करना पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में यदि निर्धारित समय पर मानदेय भी नहीं मिले तो आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है।
नवाखाई पर्व के दौरान भी भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों को त्योहार की आवश्यक खरीदारी और घरेलू खर्चों के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन मानदेय के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कर्मचारियों में आक्रोश, व्यवस्था पर सवाल
स्कूल सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे विद्यालयों में प्रतिदिन आवश्यक सेवाएं दे रहे हैं। बारिश, गर्मी और अन्य परिस्थितियों में भी स्कूल परिसर की स्वच्छता बनाए रखने का काम उनके जिम्मे है। इसके बावजूद मानदेय भुगतान की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जाना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि लंबित मानदेय का भुगतान तत्काल कराया जाए तथा भविष्य में प्रत्येक माह निर्धारित समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक परेशानियों से न जूझना पड़े।
ब्लॉक अध्यक्ष ने भी उठाया मुद्दा
स्कूल सफाई कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष ने भी मानदेय भुगतान में देरी को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को समय पर मानदेय मिलना उनका अधिकार है। यदि कार्यालय स्तर पर किसी प्रक्रिया या दस्तावेज के कारण भुगतान अटका है तो उसका तत्काल निराकरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कम मानदेय में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक-एक माह का भुगतान बेहद महत्वपूर्ण होता है। त्योहार के समय भुगतान नहीं मिलने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब कर्मचारियों की नजर संबंधित विभागीय अधिकारियों पर है कि लंबित मानदेय का भुगतान कब तक होता है और भविष्य में भुगतान व्यवस्था को नियमित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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