सारंगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर जागृति अभियान के चौथे चरण के तहत 8 सितंबर 2026 को जिलेभर में व्यापक साइबर जागरूकता अभियान चलाया गया। “स्मार्टफोन प्राइवेसी और सुरक्षित ब्राउज़िंग” थीम पर जिले के 128 स्थानों पर जागरूकता शिविर आयोजित किए गए, जिसमें करीब 17,789 नागरिकों ने भाग लेकर ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी हासिल की।
थाना-चौकी क्षेत्रों के गांवों, शहरों, स्कूलों और कॉलेजों में पहुंची पुलिस टीमों ने लोगों को स्मार्टफोन की प्राइवेसी सेटिंग मजबूत रखने, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से सावधान रहने और अनजान या लुभावने लिंक पर क्लिक नहीं करने की समझाइश दी। पुलिस ने नौकरी दिलाने, पैसा दोगुना करने तथा अन्य आकर्षक ऑफरों के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी से सतर्क रहने की अपील की। साथ ही नागरिकों को अपनी निजी जानकारी इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अनावश्यक रूप से साझा नहीं करने की सलाह दी गई। मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो के दुरुपयोग और उससे जुड़े साइबर अपराधों के प्रति भी लोगों को जागरूक किया गया।
जागरूकता शिविरों में पुलिस ने सार्वजनिक स्थानों पर उपलब्ध फ्री वाई-फाई के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। विशेष रूप से ऐसे नेटवर्क के माध्यम से बैंकिंग या वित्तीय लेन-देन नहीं करने को कहा गया, क्योंकि इससे व्यक्तिगत अथवा वित्तीय डेटा चोरी होने का खतरा हो सकता है। मोबाइल में कोई नया ऐप डाउनलोड करते समय कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट और स्टोरेज जैसी परमिशन को ध्यानपूर्वक जांचने के बाद ही अनुमति देने की समझाइश दी गई।
पुलिस ने स्क्रीन शेयरिंग फ्रॉड को लेकर भी नागरिकों को विशेष रूप से चेताया। अनजान व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड नहीं करने और किसी अजनबी को मोबाइल की स्क्रीन एक्सेस नहीं देने की सलाह दी गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि साइबर ठग सहायता करने या बैंक संबंधी समस्या दूर करने के बहाने मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर खाते से रकम उड़ा सकते हैं।
शिविरों में नागरिकों को बताया गया कि OTP, ATM कार्ड की जानकारी, CVV, UPI PIN और बैंक खाता संबंधी गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अज्ञात लिंक, संदिग्ध मैसेज और अनजान ऐप से दूरी बनाए रखना ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
पुलिस ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो वह घबराने के बजाय तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराए। ठगी की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, उतनी ही जल्दी संबंधित लेन-देन को रोकने या राशि को होल्ड कराने की कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी। अभियान के माध्यम से पुलिस ने नागरिकों से जागरूक, सतर्क और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की।


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