किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करना, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालना तथा शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना है।

जब किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है तो शुरुआत में इसके लक्षण काफी हल्के हो सकते हैं। यही वजह है कि कई लोगों को किडनी की बीमारी का पता काफी देर से चलता है।
किडनी की बीमारी बढ़ने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं, जिसका असर त्वचा, पाचन तंत्र, ऊर्जा के स्तर और पेशाब से जुड़ी आदतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, इनमें से कोई भी लक्षण अकेले किडनी खराब होने की पुष्टि नहीं करता। ऐसे लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
भूख कम होना और मितली
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ सकते हैं। इसका असर भूख पर पड़ सकता है। कुछ लोगों को लगातार भूख कम लगना, मितली या उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर वजन कम हो सकता है और शरीर कमजोर महसूस करने लगता है।
पैरों और टखनों में सूजन
किडनी शरीर से अतिरिक्त सोडियम और पानी को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती तो शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसका असर खासतौर पर पैरों, टखनों और कभी-कभी आंखों के आसपास सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, पैरों में सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर किडनी की बीमारी मान लेना सही नहीं है।
त्वचा में खुजली और रूखापन
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने और मिनरल्स के असंतुलन के कारण त्वचा में खुजली और रूखापन हो सकता है। कुछ मरीजों में त्वचा असामान्य रूप से सूखी महसूस हो सकती है। यदि लगातार खुजली की समस्या बनी हुई है और इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं समझ आ रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
हर समय थकान और कमजोरी
लगातार थकान, कमजोरी या पहले की तुलना में कम ऊर्जा महसूस होना भी किडनी की बीमारी से जुड़ा हो सकता है। किडनी की बीमारी बढ़ने पर एनीमिया समेत कई समस्याएं हो सकती हैं, जिससे व्यक्ति को सामान्य काम करने में भी ज्यादा थकान महसूस हो सकती है। अगर पर्याप्त आराम के बावजूद लंबे समय तक कमजोरी और थकान बनी रहे तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
पेशाब में बदलाव
पेशाब के पैटर्न में बदलाव किडनी और मूत्र प्रणाली से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा या कम पेशाब आ सकता है। रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना भी एक संकेत हो सकता है।
इसके अलावा पेशाब में झाग, पेशाब का रंग बदलना या पेशाब में खून आना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, पेशाब में बदलाव कई अन्य बीमारियों और स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं।
कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द
कमर या पीठ के निचले हिस्से में दर्द को हमेशा किडनी की बीमारी से जोड़ना सही नहीं है। लेकिन अगर दर्द के साथ पेशाब में जलन, खून, बुखार या पेशाब से जुड़ी दूसरी समस्या भी हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
सांस लेने में परेशानी
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने से कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के आसपास या उनमें तरल पदार्थ जमा होने की समस्या भी हो सकती है। सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय से जुड़ी बीमारी है, उनमें किडनी की बीमारी का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास होने पर भी नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी हो सकती है।
किडनी की बीमारी की शुरुआती पहचान के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड और यूरिन टेस्ट करा सकते हैं। ब्लड में क्रिएटिनिन और eGFR तथा यूरिन में एल्ब्यूमिन जैसे परीक्षण किडनी की कार्यक्षमता और नुकसान का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
किडनी की बीमारी को कई बार ‘साइलेंट’ बीमारी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। खासकर जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। अगर पैरों में लगातार सूजन, पेशाब में खून, पेशाब की आदतों में अचानक बदलाव, लगातार मितली, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज न करें और चिकित्सकीय सलाह लें।
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