समय के साथ लोगों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है। दरअसल, हमारी लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों में आए बदलाव का सीधा असर वजन या मोटापे पर देखने को मिलता है। मोटापे के कारण व्यक्ति में डायबिटीज, हाई बीपी और अन्य मेटाबॉलिक रोग होने का जोखिम बढ़ जाता है।

इस वजह से सही समय पर मोटापे को कंट्रोल करना बेहद जरूरी होता है। लेकिन जब वजन को कंट्रोल करने की बात आती है तो सबसे पहले हम अपनी इटिंग हैबिट्स को ही दोष देते हैं। साथ ही, सप्ताह में कुछ दिन फास्टिंग से मोटापे को कंट्रोल करने का प्रयास करते हैं। वहीं, कुछ लोगों में ओवर नाइट फास्टिंग का प्रचलन भी बड़ा है। ऐसे में आगे जानते हैं कि क्या वाकई में ओवरनाइट फास्टिंग से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।
क्या सिर्फ 12 घंटे की फास्टिंग से वास्तव में वजन कम हो सकता है?
इस सवाल का सीधा जवाब है-हो सकता है, लेकिन केवल 12 घंटे फास्टिंग अपने आप वजन घटाने की गारंटी नहीं देती। मैयोक्लीनिक के अनुसार वजन कम होने का सबसे महत्वपूर्ण आधार लंबे समय में ऊर्जा संतुलन यानी शरीर द्वारा खर्च की जाने वाली ऊर्जा और भोजन से मिलने वाली ऊर्जा के बीच अंतर है।
इसका मतलब है कि अगर 12 घंटे की फास्टिंग के कारण रात के बिस्कुट, मिठाई, चिप्स, शुगर ड्रिंक्स या देर रात के स्नैक्स कम हो जाते हैं, तो कुल कैलोरी सेवन घट सकता है और इससे वजन कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति 12 घंटे फास्टिंग के बाद दिन में जरूरत से ज्यादा कैलोरी खा लेता है, तो केवल फास्टिंग विंडो रखने से वजन कम होना जरूरी नहीं है।
मेटाबॉलिज्म पर 12 घंटे की फास्टिंग का क्या असर पड़ सकता है?
एनसीबीआई के अनुसार मेटाबॉलिज्म केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कितने घंटे खाना नहीं खाया। नींद, शारीरिक गतिविधि, मांसपेशियों की मात्रा, उम्र, हार्मोन, कुल कैलोरी और भोजन की गुणवत्ता भी इसमें भूमिका निभाते हैं। कुछ स्टडीज में लोगों पर टाइम रिस्ट्रिक्टेड इटिंग से बॉडी वेट, बीएमआई, फैट मास, फास्टिंग ग्लुकोज और ट्राइग्लिसराइड में सुधार देखा गया है। हालांकि अलग-अलग इटिंग ड्यूरेशन के रिजल्ट एक जैसे नहीं देखे गए।
इंसुलिन सेंसिटिविटी पर क्या असर पड़ता है?
इंटरनलनेशनल डायबिटिक फेडरेशन के अनुसार इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसी विभिन्न उपवास विधियां अलग-अलग लाभ प्रदान करती हैं। कुछ शोधों से पता चलता है कि दिन में 16 घंटे उपवास करना और 8 घंटे के भीतर भोजन करना ब्लड शुगर के स्तर को कम करने और अल्पावधि में वजन घटाने में सहायक हो सकता है।
क्या सच में ओवरनाइट फास्टिंग से वजन कम हो सकता है?
एनसीबीआई के मुताबिक रात भर उपवास (fasting) करने से वजन घटाने में मदद मिल सकती है। यह तब सबसे अच्छा काम करता है जब आप शाम को जल्दी खाना बंद कर देते हैं और देर रात स्नैक्स नहीं खाते; इससे आपके शरीर की नैचुरल क्लॉक (biological clock) के साथ तालमेल बना रहता है और कुल कैलोरी इनटेक कम हो जाता है।
यह कैसे काम करता है?
कम कैलोरी लेना: रात में खाना बंद करने से अतिरिक्त और अक्सर ज्यादा कैलोरी वाले स्नैक्स खाने से बचा जा सकता है।
बेहतर ब्लड शुगर: शरीर को खाने से लंबा ब्रेक देने पर इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है, जिससे शरीर को ऊर्जा के लिए जमा फैट को बर्न करने में मदद मिलती है।
सर्केडियन रिदम (शरीर की नैचुरल घड़ी): देर रात खाने की तुलना में दिन में जल्दी खाना आपके मेटाबॉलिज्म के लिए ज्यादा बेहतर होता है।
12 घंटे की ओवरनाइट फास्टिंग वजन घटाने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे कोई मैजिकल वेट लॉस फार्मूला नहीं माना जाना चाहिए। इसका सबसे व्यावहारिक फायदा देर रात की अनावश्यक खाने की आदत को कम करना और मील टाइमिंग को व्यवस्थित करना हो सकता है। इसके साथ ही एक्टिव जीवनशैली और हेल्दी खाने की आदत बनाना भी आवश्यक है।
