छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करने वाली एक बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। समय पर 102 महतारी एक्सप्रेस एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण तीन महीने की गर्भवती महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि परिजनों को उसे निजी साधन और नाव के सहारे अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया।
जानकारी के मुताबिक, मामला कांकेर क्षेत्र के ग्राम केंदाडी का बताया जा रहा है। यहां रहने वाली करीब तीन महीने की गर्भवती महिला सुलाता जाड़े की तबीयत पिछले दो दिनों से खराब थी। परिवार के मुताबिक महिला को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, जिसके कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
महिला की तबीयत गंभीर होने पर परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए 102 महतारी एक्सप्रेस को फोन किया। परिवार को उम्मीद थी कि सरकारी एंबुलेंस समय पर गांव पहुंचेगी और महिला को अस्पताल ले जाकर उसका इलाज कराया जा सकेगा।
हालांकि, खबर के मुताबिक एंबुलेंस की ओर से करीब एक घंटे बाद पहुंचने की बात कही गई। महिला की बिगड़ती हालत को देखते हुए परिजनों ने इंतजार करने के बजाय अपने स्तर पर उसे अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया।
छत्तीसगढ़ में 102 महतारी एक्सप्रेस का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करना है। सरकारी जानकारी के अनुसार 102 महतारी एक्सप्रेस गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क परिवहन सेवा के रूप में संचालित की जाती है।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती देख परिजन निजी साधन से उसे अस्पताल ले जाने के लिए निकले। रास्ते में नदी पड़ने के कारण उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ा।
बताया गया है कि नाव से नदी पार करते समय ही महिला की सांसें थम गईं। यानी जिस महिला को समय पर अस्पताल और चिकित्सकीय सहायता की जरूरत थी, वह स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गई।
इस घटना ने एक बार फिर कांकेर जैसे दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल तक पहुंचने के लिए सड़क, नदी और परिवहन जैसी कई चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। ऐसे में आपात स्थिति में एंबुलेंस की उपलब्धता और समय पर पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
परिजनों के अनुसार, सुलाता की तबीयत करीब दो दिनों से खराब थी। 16 अगस्त को परिजन उसे इलाज के लिए छोटे बेठिया ले गए थे। वहां चिकित्सकीय जांच के दौरान खून की जांच में पीएफ मलेरिया की पुष्टि हुई।
चिकित्सक ने महिला को प्राथमिक उपचार और दवा दी। लेकिन उसकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कराने की सलाह दी गई थी।
इसके बाद महिला को बेहतर उपचार के लिए ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ गई। समय पर परिवहन की सुविधा नहीं मिलने और अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के बीच महिला की मौत हो गई।
इस घटना ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना है, लेकिन यदि दूरस्थ गांवों में मरीजों को एंबुलेंस के इंतजार के बजाय निजी साधन और नाव का सहारा लेना पड़े तो व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
102 महतारी एक्सप्रेस सेवा गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने और प्रसव के बाद घर तक पहुंचाने जैसी सुविधाओं के लिए संचालित की जाती रही है।
कांकेर में इससे पहले भी खराब सड़क और दुर्गम रास्तों के कारण गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस तक पहुंचने में परेशानी की खबरें सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2025 में कोयलीबेड़ा क्षेत्र में एक गर्भवती महिला को खराब सड़क के कारण एंबुलेंस तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर पैदल चलना पड़ा था।
सुलाता जाड़े की मौत के मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 102 एंबुलेंस को सूचना मिलने के बाद वह समय पर क्यों नहीं पहुंच सकी? क्या गांव तक पहुंचने में सड़क या नदी की समस्या थी, या एंबुलेंस की उपलब्धता से जुड़ी कोई परेशानी थी? इन सवालों का जवाब संबंधित स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था की गंभीरता को सामने लाती है। जरूरत है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि महिला को समय पर चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
