सारंगढ़। सारंगढ़ जिला मुख्यालय के कोसीर गांव में पिछले कुछ वर्षों से विद्युत व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। बीते दो दिनों से बिजली की समस्या ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। बार-बार लाइन गुल होने से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी समस्या पेयजल को लेकर सामने आ रही है। बिजली बंद रहने के कारण पानी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बिजली की आंख-मिचौली ने घरेलू कामकाज से लेकर छोटे कारोबार तक को प्रभावित कर दिया है।

बैंक भी बिजली के भरोसे
कोसीर गांव का इकलौता बैंक भी विद्युत समस्या से अछूता नहीं है। बिजली गुल रहने के कारण बैंकिंग कार्य प्रभावित हो रहे हैं और उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बैंक पहुंचने वाले लोगों को जरूरी लेन-देन और अन्य कामों के लिए बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है।
सब स्टेशन होने के बाद भी समस्या बरकरार
ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोसीर में विद्युत सब स्टेशन होने के बावजूद बिजली व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो पा रहा है? यदि स्थानीय स्तर पर विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था मौजूद है, तो बार-बार सामने आ रही समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत समस्या कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से बिजली की अनियमित आपूर्ति, बार-बार लाइन बंद होने और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं से लोग परेशान हैं। खासकर निचली बस्तियों में लो-वोल्टेज की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
बरसात में बढ़ा खतरा
बरसात के मौसम में बिजली की अनियमितता ग्रामीणों के लिए और अधिक चिंता का विषय बन जाती है। एक ओर जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है, वहीं दूसरी ओर अंधेरे में लोगों को आवागमन सहित कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विद्युत व्यवस्था का सुचारू रहना बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों के बीच अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर इस अव्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा? शिकायतों के बावजूद यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता है तो आम उपभोक्ता अपनी परेशानी लेकर आखिर किसके पास जाए?
कोसीर के लोगों को उम्मीद है कि विद्युत विभाग इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बिजली आपूर्ति व्यवस्था की जांच करेगा और बार-बार हो रही बिजली कटौती, लो-वोल्टेज तथा अन्य तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान करेगा। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की यह परेशानी कब दूर होती है और विद्युत व्यवस्था कब पटरी पर लौटती है।
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