सारंगढ़-बिलाईगढ़, 8 अगस्त 2026। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी पद्मिनी भोई साहू की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभागार में वर्ष 2023 में लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के प्रशिक्षण एवं समीक्षा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने जिले में कानूनों के प्रभावी पालन और क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा, न्यायिक अधिकारी, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी तथा जिले के सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे। प्रशिक्षण के दौरान नए कानूनों के प्रावधानों, तकनीकी व्यवस्थाओं और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तार से जानकारी दी गई।
1 जुलाई 2024 से लागू हैं तीन नए कानून
प्रशिक्षण में बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) देशभर में 1 जुलाई 2024 से लागू हैं। इन कानूनों का उद्देश्य आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।
अधिकारियों को आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ई-लर्निंग पाठ्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। प्लेटफॉर्म पर 110 ई-लर्निंग कोर्स उपलब्ध हैं, जिनमें 76 पाठ्यक्रम नए आपराधिक कानूनों से संबंधित हैं।
जांच से लेकर अदालत तक तकनीक का बढ़ेगा इस्तेमाल
नए कानूनों के तहत आपराधिक न्याय प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत ई-एफआईआर, ई-समन, तलाशी एवं जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, फोरेंसिक साक्ष्यों के संग्रह की वीडियोग्राफी और बयानों की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालयीन कार्यवाही, मेडिकल लीगल एग्जामिनेशन एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए डिजिटल व्यवस्था तथा पुलिस, न्यायालय, जेल, अभियोजन और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के बीच दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का उपयोग किया जा रहा है।
पीड़ितों के अधिकारों पर भी जोर
प्रशिक्षण में बताया गया कि नए कानूनों में पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत करने के साथ जांच प्रक्रिया को समयबद्ध और अधिक प्रभावी बनाने का प्रावधान है। गंभीर अपराधों की जांच निर्धारित समयावधि में पूरी करने, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एफआईआर, आरोप पत्र और समन की प्रक्रिया को आसान बनाने तथा पीड़ितों को जांच की प्रगति की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
अधिकार क्षेत्र की बाध्यता को कम करते हुए किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था, जिसे आमतौर पर जीरो एफआईआर की व्यवस्था से जोड़ा जाता है, भी नए आपराधिक न्याय ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक जांच के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है।
डिजिटल साक्ष्य को मिली महत्वपूर्ण भूमिका
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लिया है। नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ई-मेल, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल उपकरणों से प्राप्त डेटा, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सहित विभिन्न डिजिटल साक्ष्यों को कानूनी प्रक्रिया में स्वीकार्यता प्रदान की गई है।
प्रशिक्षण में बताया गया कि डिजिटल साक्ष्य का महत्व साइबर अपराध, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन संचार से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ रहा है। नए प्रावधान न्यायिक प्रक्रिया को आधुनिक तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने सभी संबंधित अधिकारियों को नए कानूनों की जानकारी को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।


- बैंक हड़ताल अचानक क्यों टल गई? क्या सरकार ने मान ली मांगें? - September 28, 2026
- विराट कोहली ने 55वां वनडे शतक जड़कर बनाए 10 रिकॉर्ड, सचिन के दो कीर्तिमान किए ध्वस्त और दो खतरे में डाले… - September 28, 2026
- 18 सितंबर 2026 राशिफल: ग्रहों की चाल से खुले सफलता के नए रास्ते, जानिए मेष से मीन तक किस राशि के लिए कैसा रहेगा दिन… - September 28, 2026
