सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अनूठी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने वाली राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रामनामी समुदाय पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का विशेष प्रदर्शन रविवार को सरसीवा थिएटर में किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडेय, पूर्व विधायक कामदा जोल्हे, गणमान्य नागरिक ज्योति लाल पटेल सहित जिला एवं ब्लॉक स्तर के अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में रामनामी समाज के सदस्य उपस्थित रहे।
डॉक्यूमेंट्री में रामनामी समुदाय के इतिहास, स्थापना, धार्मिक आस्था, जीवन शैली और सांस्कृतिक परंपराओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि किस प्रकार समाज के लोग अपने शरीर पर भगवान श्रीराम का नाम अंकित कर अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हैं तथा रामनामी मेले के धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, सामूहिक रामायण पाठ और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को जीवंत रूप में दर्शाया गया।
डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन के बाद कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू एवं उपस्थित अधिकारियों ने रामनामी समाज के वरिष्ठजनों का श्रीफल, शॉल और रामायण ग्रंथ भेंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने भी जिला प्रशासन द्वारा उनकी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सम्मान के प्रयासों की सराहना की।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने कहा कि रामनामी समुदाय केवल सारंगढ़-बिलाईगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान है। इस समाज की आस्था, परंपराएं और जीवन मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि 72वें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित यह डॉक्यूमेंट्री सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती और जांजगीर-चांपा जिले के लिए गर्व का विषय है तथा इसके माध्यम से देश-दुनिया के लोग रामनामी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित होंगे।
कार्यक्रम में बिलाईगढ़ एसडीएम प्रफुल्ल रजक, सरसीवा तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर, पटवारी, विभिन्न विभागों के जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में रामनामी समाज के सदस्य मौजूद रहे। पूरे आयोजन का वातावरण श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक गौरव से सराबोर रहा।
यह आयोजन जिले की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त इस डॉक्यूमेंट्री ने न केवल रामनामी समुदाय की ऐतिहासिक विरासत को सशक्त रूप में सामने रखा, बल्कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई भी प्रदान की।

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