सारंगढ़। राजनीति में पद तो बहुतों को मिलते हैं, लेकिन जन-जन के दिलों में जगह बनाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। सारंगढ़ शहर से सटे ग्राम चंदाई की माटी में 24 जुलाई 1986 को जन्मे रमेश खूंटे जी आज एक ऐसे ही जनप्रिय और प्रेरणादायी “युवा तुर्क” नेता के रूप में उभर चुके हैं। छात्र जीवन से ही संघर्षशील, हंसमुख, नरम दिल और साफ़-सुथरी छवि वाले रमेश जी ने अपनी मेहनत और व्यवहारकुशलता से पूरे क्षेत्र में एक अलग और मिसाली पहचान बनाई है।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर पूरे क्षेत्र के युवाओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं में भारी उत्साह है। हर कोई अपने इस लोकप्रिय युवा नेता की लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।

कार्यकर्ता से शुरू हुआ समर्पित सफर-
रमेश खूंटे जी की पहचान कभी किसी पद की मोहताज़ नहीं रही। उन्होंने कांग्रेस पार्टी में एक सच्चे और समर्पित सिपाही के रूप में धरातल से सेवा शुरू की। उनके उत्कृष्ट कार्य और संगठन के प्रति निष्ठा को देखते हुए 2018 व 2021: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी (अनुसूचित जाति विभाग, सारंगढ़ ग्रामीण) के अध्यक्ष के रूप में लगातार दो बार मनोनीत हुए और युवाओं की एक मजबूत फौज खड़ी की।
2024 मे उनकी माता जी स्व. समुंद बाई खूंटे ने उनके कुशल नेतृत्व में गृह ग्राम चंदाई से सरपंच चुनाव में एक ऐतिहासिक और विशाल अंतर से जीत दर्ज की।
विगत वर्ष 2025 मे संगठन के प्रति उनके जनसमर्पण को देखते हुए उन्हें छिंद (चंदाई) कांग्रेस कमेटी का मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
जिला कार्यालय के लिए दान कर दी अपनी निजी जमीन-
रमेश खूंटे जी का दिल कितना बड़ा है और पार्टी के प्रति उनका समर्पण कितना अटूट है, इसकी सबसे बड़ी नजीर तब देखने को मिली जब उन्होंने सारंगढ़ जिला कांग्रेस कार्यालय निर्माण के लिए अपनी निजी 10 डिसमिल जमीन दान में दे दी।
उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व योगदान ने पूरे जिले के कार्यकर्ताओं का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। सारंगढ़ के वरिष्ठ नेताओं से लेकर प्रदेश स्तर के शीर्ष नेतृत्व ने उनके इस त्याग, समर्पण और उदारता का खुले दिल से स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं कीं।
संघर्षों से तपकर निखरा नेतृत्व-
उपचुनाव में निर्विरोध जीत का रचा इतिहास-
माता जी के अचानक देहांत से रमेश जी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वे कुछ समय के लिए निशब्द और स्तब्ध रहे। लेकिन “सफ़र लंबा है और जनता का काम नहीं रुकना चाहिए” इसी हौसले के साथ उन्होंने दोबारा खुद को खड़ा किया।
गाँव की राजनीति की सबसे बड़ी नज़ीर-
पंचायत चुनाव में जहां हर एक वोट के लिए कड़ा मुकाबला होता है, वहां रमेश खूंटे जी की लोकप्रियता और कुशल नेतृत्व का ही जादू था कि ग्राम चंदाई के उपचुनाव में उनकी बड़ी भाभी श्रीमती इंदु खूंटे जी निर्विरोध सरपंच चुनी गईं।
गांव के हर वर्ग द्वारा उन्हें निर्विरोध स्वीकार करना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जनता के दिलों पर रमेश खूंटे जी का नाम नहीं, उनका काम राज करता है!
युवा कार्यकर्त्ताओं का अटूट विश्वास –
आज सारंगढ़ की राजनीति में रमेश खूंटे सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भरोसे और युवा शक्ति का प्रतीक बन चुके हैं। प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं का भी मानना है कि उनकी साफ़-सुथरी कार्यशैली, सबको साथ लेकर चलने की कला और कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में ढाल बनकर खड़े रहने का स्वभाव उन्हें सबसे अलग बनाता है।
पार्टी का कोई भी निर्देश हो या जनता की कोई समस्या, रमेश जी हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े मिलते हैं।
”जो ज़मीन से जुड़ा होता है, वही आसमान छूता है!”
आज 24 जुलाई को रमेश खूंटे जी के जन्मदिन के इस खास मौके पर पूरा सारंगढ़ क्षेत्र उनके दीर्घायु जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और यशस्वी राजनीतिक भविष्य की कामना करता है।




